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जेब हुई खाली तो भूखे ही घरों को निकल पड़े मजदूर

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शांतिपुरी में नैनीताल बॉर्डर पर मौजूद मजदूर - फोटो : AMAR UJALA
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रुद्रपुर। साहब! जेब में रुपये खत्म हो गए हैं। दो दिन से भूखे हैं और घर भेजने की लगातार गुहार के बावजूद प्रशासन में सुनवाई नहीं हो रही है। अब मजबूरी में पैदल ही कुशीनगर (यूपी)और बेतिया (बिहार) में अपने घरों को पैदल जा रहे हैं। जितना चल सकेंगे चलेंगे और रास्ते में कहीं रहम पर खाना मिलेगा तो खा लेंगे। मंगलवार को जवाहरनगर गोल गेट पर पहुंचे 20 मजदूरों का दर्द एक जैसा था। समाजसेवियों की नजर मजदूरों पर पड़ी तो उन्होंने भोजन करा दिया। सभी मजदूर प्रशासनिक व्यवस्था से खिन्न दिखे। बताया कि नैनीताल से सोमवार की सुबह तीन बजे बिहार के लिए निकले थे। मंगलवार को हल्द्वानी के पांच साथी और मिले और सभी पैदल घर को जा रहे हैं। बताया कि वे राजमिस्त्री और कारपेंटर का काम करते हैं। लॉकडाउन में सारे काम बंद होने के बाद वे काफी परेशान हैं। कईं बार प्रशासन के चक्कर भी लगवाए और हर बार घर भेजने का आश्वासन भी मिला। उन्होंने स्वस्थ होने का मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ ही बिहार जाने के लिए किए गए रजिस्ट्रेशन के बाद मोबाइल में आए एसएमएस भी दिखाए। मजदूर मनेजर साहनी और जमशेद आलम ने बताया कि सभी के पास रुपये खत्म हो गए हैं। उन लोगों ने दो दिन से कुछ नहीं खाया है। कईं बार प्रशासन से घर भेजने के लिए नाम भी लिखवाए, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो पैदल ही घर जाने का फैसला करना पड़ा। काठगोदाम में पुलिस भी सख्ती से पेश आई थी। कुछ साथियों के पैरों में छाले भी पड़ गए, लेकिन मजबूरी है घर तो जाना ही है। इधर सूचना पर पंतनगर पुलिस ने सभी को एक बस में बिठाकर लॉलकुआं बार्डर पर ले जाकर नैनीताल पुलिस के हवाले कर दिया। इधर कुछ समाजसेवी भूखे मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था में जुट गए।
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