सरकार नगर के नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधायें उपलब्ध करवाने के लिए गंभीर नहीं दिखती। कभी रुद्रपुर और किच्छा के बीच कई सिटी बसें चलती थीं लेकिन सरकारी लापरवाही से यहां के नागरिकों को अपनी जान जाखिम में डालकर ऑटो से यात्रा कर रुद्रपुर जाना पड़ता है। दशकों पहले तत्कालीन विधायक तिलक राज बेहड़ के प्रयासों से बस अड्डे विहीन इस नगर को रोडवेज बस स्टैंड की सौगात मिली तो लोगों की उम्मीदें जगी कि यहां से देश के विभिन्न नगरों को जाने के लिए बसें उपलब्ध होंगी लेकिन कुछ महीनों में ही यह सपना धराशाही हो गया। आज नगर से किसी भी रूट को सीधी बस उपलब्ध नहीं है। सरकारी मशीनरी की लापरवाही का लाभ प्राइवेट वाहन स्वामी उठा रहे हैं। रोडवेज की बाउंड्री के साथ सितारगंज, खटीमा व नानकमता जाने वाली बसें लगती हैं तो मेन बाजार वाले गेट के ठीक सामने हल्द्वानी, लालकुआं, नगला जाने वाली बसें खड़ी होती हैं। रोडवेज बस अड्डा चारों ओर से प्राइवेट वाहनों से घिरा रहता है, बस अड्डे की खूबसूरती को बदरंग करने में दीवारों पर लगी फ्लेक्सियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।