काशीपुर। बहल्ला नदी का जलस्तर कम होने पर मंगलवार देर शाम राधेहरि पीजी कॉलेज के राहत शिविर में रह रहे हेमपुर इस्माइल हिम्मतपुर के प्रभावित 49 परिवार घर तो लौट गए लेकिन पाई-पाई जोड़कर बनाए आशियाने की दुर्दशा देखकर उनके आंसू नहीं थमे। सिसकती महिलाएं घर को फिर से समेटते हुए कहती दिखीं कि उन्होंने पाई-पाई जोड़ कर खुशियों का संसार सजाया था लेकिन प्रकृति की मार ने सब बिखेर कर रख दिया। भावुक माता-पिता से अलग बच्चे अपने खिलौने तलाशते दिखे। लोगों का कहना था कि कुदरत के वार से उनका खुशियों का अशियाना तिनके की तरह बिखर गया। अब उनके सामने फिर से नई शुरूआत करने की चुनौती आ खड़ी हुई है। पेश है अरुण कुमार और अभिषेक रावत की रिपेार्ट....
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लक्ष्मी को सता रही भविष्य की चिंता
काशीपुर। बाढ़ प्रभावित लक्ष्मी बताती हैं कि डेढ़ साल पहले पति मेहराज आईजीएल में बतौर मुंशी काम करते थे। इसके बाद अचानक उनको लकवा पड़ गया। बाढ़ के समय वह नदी में बह गए थे। लोगों ने उन्हें पानी से खींचकर बामुश्किल बचाया है। वह अब घरों में झाड़ू-पोछा कर पति की दवाई और घर का गुजरा कर रही है। अब उसे फिर से अपना घर बनाने की चिंता सता रही है। संवाद
घरों में पड़ीं दरार,
काशीपुर। करतार सिंह के घर में पानी जमा होने से गहरी दरारें आ गई हैं। उन्होंने बताया कि दूध बेचकर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। पानी जमा होने से पूरे घर में दरार आ गई और पशु भी बीमार हो गए हैं। चन्नू सिंह ने बताया कि उनकी बहल्ला नदी किनारे करीब दो बीघा जमीन है, जिसमें वह झोपड़ी डालकर अकेले रहते हैं। बाढ़ में उनकी झोपड़ी, चारपाई, साइकिल सब कुछ बह गया। सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। संवाद
आंगनबाड़ी केंद्र में पानी घुसने से दस्तावेज गले
काशीपुर। हेमपुर इस्माइल नंबर एक आंगनबाड़ी केंद्र में भी बाढ़ का पानी करीब तीन फुट पानी और कीचड़ जमा हो गया था। इसके चलते बच्चों की उपस्थिति, खजूर, टीकाकरण, गर्भवती, धात्रियों, पौषाहार आदि के दस्तावेज गल गए। खजूर, दूध और पौषाहार भी खराब हो गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रुकसाना, सहायिका शीला ने बताया कि वह तीन दिन से दूर से पानी लाकर केंद्र में जमा कीचड़ की सफाई करनी पड़ी। विभाग के किसी भी कर्मचारी ने सुध अब तक नहीं ली है। संवाद
- पति आईजीएल में श्रमिक हैं। तीन साल पहले टिनशेड का आशियाना बनाया था। बच्चों के कपड़े, किताबें, घर का राशन सब कुछ बह गया है। घर की स्थिति बिल्कुल भी सही नहीं है। दूसरी जगह पर किराए पर कमरा लेकर रह रहे हैं। - पूनम
- मेहनत मजदूरी कर परिवार का भोषण करते आ रहे हैं। राहत केंद्र से वापस घर लौट आकर देखा तो घर का समान सब बिखरा पड़ा था। सब कुछ बर्बाद हो गया है। प्रशासन से मिलने वाली राहत से बमुश्किल गुजारा हो रहा है। - निर्मला
- घर में 12 में से 7 क्विंटल गेंहू खराब हो गए हैं। घर के आसपास गड्ढे हो गए हैं। खाने और रहने की व्यवस्था नहीं है। रहने के लिए किराए पर कमरा लिया है। घर में जाने के लिए अभी नदी के बीच होकर जाना पड़ रहा है। - कुलदीप कुमार
- मैं मजदूरी करता हूं। राहत केंद्र से घर पहुंच कर देखा तो घर में सारा सामान तिनके-तिनके तरह बिखरा पड़ा था। जिसे देखकर आंखों से आंसू आने लगे। अंदर जाकर देखा तो बहुत सा सामान पानी के साथ बह गया। - करन सिंह