काशीपुर। नशे के काले कारोबार के लिए पंजाब पहले पायदान पर रहा है लेकिन अब देवभूमि उत्तराखंड को भी ड्रग माफिया ने अपनी चपेट में ले लिया है। कुमाऊं के पर्वतीय जिलों समेत तराई में नशे का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार ऊधमसिंह नगर में रोजाना 20 लाख के मादक पदार्थों की तस्करी हो रही है।
उत्तराखंड में पिछले दशक से नशाखोरी बढ़ी है। काशीपुर समेत तराई के दूसरे शहरों में ड्रग की खेप फतेहपुर (बरेली), ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद, चंडीगढ़, दिल्ली आदि क्षेत्रों से आती है। ड्रग माफिया से सांठगांठ के लिए बरेली पुलिस हमेशा चर्चा में रहती है। दोनों राज्यों के पुलिस अधिकारियों की बैठक में उत्तराखंड पुलिस इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा चुकी है। तराई से खटीमा, टनकपुर, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़ तक मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही है।
शैक्षिक और कोचिंग इंस्टीट्यूट के विद्यार्थी, सरकारी दफ्तरों में आने वालों से लेकर किसानों तक के बच्चे ड्रग माफिया के निशाने पर हैं। काशीपुर के कुछ चुनिंदा इलाके जैसे द्रोणसागर टीला, पार्क, सरकारी अस्पताल आदि स्थान नशेड़ियों के अड्डे बने हैं। शिक्षण संस्थानों की इमारतों और क्रीड़ा मैदानों में जहां-तहां दवाई की खाली शीशियां, इंजेक्शन, स्मैक पेपर, सिरिंज आदि बिखरे मिल रहे हैं।
एसपी चंद्रमोहन सिंह ने बताया कि काशीपुर, जसपुर, बाजपुर, गदरपुर, केलाखेड़ा, दिनेशपुर थानों में पिछले छह माह में नारकोटिक्स एक्ट के 70 से अधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। काशीपुर में कई ड्रग तस्करों को एक से अधिक बार पकड़ा जा चुका है। ड्रग माफिया पर पुलिस पैनी नजर रख रही है। उनके खिलाफ गैंगस्टर और गुंडा एक्ट की कार्रवाई की जा रही है।
तस्करी में अब महिलाओं के भी शामिल होने से पुलिस को उनकी धरपकड़ में दिक्कत आ रही है। इसके बावजूद पुलिस पिछले चार वर्षों में 16 महिला ड्रग्स तस्करों को गिरफ्तार कर चुकी है। कई प्रतिष्ठित घरानों के बच्चे भी नशे की लत में पड़कर अपनी जिंदगी से खेल रहे हैं।
केस एक
एक प्रमुख उद्योगपति का पुत्र अपने पैतृक कारोबार को आगे बढ़ा रहा था लेकिन अचानक उसे नशे की लत लग गई। महंगे नशे ने उसकी हालत बिगाड़ दी। पिता ने पुलिस की मदद से उसे दिल्ली के नशामुक्ति केंद्र में पहुंचाया। इसके बावजूद उसने नशा नहीं छोड़ा। उसकी लत से परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा है।
केस दो
काशीपुर में एक इंटर कॉलेज के संचालक का पुत्र नशे की लत में पढ़ गया। वह कभी भी हिंसक हो जाता है। इस कारण अक्सर उसका झगड़ा होता रहता है। उसकी हरकतों से परिवार की शांतिभंग हो गई है। दिल्ली के नशामुक्ति केंद्र में काउंसिलिंग कराने के बावजूद उसकी भी लत नहीं छूट रही है।