रुद्रपुर। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए भले ही ऑनलाइन प्रक्रिया का दावा किया जा रहा हो, लेकिन अब भी कई कार्यों के लिए लोगों को आरटीओ कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। एआरटीओ के अनुसार आवेदन के समय ही लिफाफा जमा करने वालों को डाक से कार्ड भेजा जा रहा है, जबकि अन्य लोगों को कार्यालय पहुंचना पड़ता है। ऐसे मेें आम आदमी दलालों को पैसा देने को मजबूर है।
बाजपुर निवासी रंजीव का ड्राइविंग लाइसेंस बनने के बाद भी मिल नहीं सका है। डीएल पाने के लिए रंजीव लंबे समय से कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। अब उन्होंने मामले की शिकायत सीएम पोर्टल मेें की है। सीएम पोर्टल से भी उन्हें अभी न्याय नहीं मिल सका है। इस मामले में एआरटीओ पूूूजा नयाल ने बताया कि डीएल को डाक से भेजने के लिए आवेदक को अपने फार्म के साथ डाक टिकट सहित अपना पता लिखा एक लिफाफा देना होता है। इसके बाद डीएल डाक से आवेदक के घर भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि डीएल बनवाने वाले लोग फार्म के साथ डाक टिकट लगा लिफाफा नहीं दे रहे हैं। इसी वजह से उन्हें दफ्तर से आकर डीएल लेना पड़ता है। उन्होंने बताया कि लिफाफे में पते गलत लिखे होते हैं तो डीएल वापस कार्यालय में आ जाता है और उसके रखरखाव में समस्या होती है।
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चार से अधिक बार चक्कर लगाने के बाद भी नहीं बना डीएल
रुद्रपुर। आरटीओ कार्यालय में आवेदन करने आए कुछ लोगों ने बताया कि चार से अधिक बार चक्कर लगाने के बाद भी डीएल नहीं बन पा रहा है। डीएल का नवीनीकरण कराने आए लोगों ने बताया कि पहले की अपेक्षा अब अधिक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। संवाद
कोट
दलालों की चक्कर में न फंसकर स्वयं अक्तूबर से डीएल नवीनीकरण के लिए चक्कर लगा रहा हूं। अभी तक नवीनीकरण नहीं हो सका है। 20 साल पहले जब लाइसेंस बनवाया तो आसानी से बन गया था।
- सतीश कुमार, गदरपुर।
कोट
अगस्त में टेस्ट हुआ था। उसके बाद तीन चक्कर लगा चुुका हूं, लेकिन अब तक डीएल नहीं बना सका है।
- आदित्य, सितारगंज।
सतीश कुमार।- फोटो : RUDRAPUR