रुद्रपुर में धरना देते फार्मासिस्ट। संवाद
रुद्रपुर/काशीपुर/बाजपुर। फार्मासिस्ट के पदों की बहाली के लिए गठित की गई आईपीएचएस (इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड) की रिपोर्ट लटकाने और पदनाम परिवर्तन न करने समेत विभिन्न मांगों की अनेदखी पर डिप्लोमा फार्मासिस्ट का आक्रोश फूट पड़ा। जिलेभर के डिप्लोमा फार्मासिस्ट ने इसके विरोध में सीएमओ कार्यालय में धरना दिया।
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय में धरना देते हुए जिलेभर के डिप्लोमा फार्मासिस्ट ने कहा कि आईपीएचएस-2022 के नए मानक लागू होने के बाद फार्मासिस्ट पदों पर भारी कटौती की है। ऊधम सिंह नगर में फार्मासिस्ट के 17 पदों की कटौती की गई। पहले जिले में फार्मासिस्ट के 66 पद थे, जो अब घटकर 49 रह गए हैं। उन्होंने कहा कि खत्म किए गए फार्मासिस्ट पदों की बहाली के लिए चार माह पहले स्वास्थ्य महानिदेशक की अध्यक्षता में आईपीएचएस संशोधन कमेटी गठित की गई थी लेकिन कमेटी ने अभी तक अपनी आख्या प्रस्तुत नहीं की है। जिस कारण फार्मासिस्ट पदोन्नति के लाभ से भी वंचित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से फार्मासिस्ट के पदनाम भी स्टाफ नर्स की भांति बदलने की मांग की जा रही है। वर्तमान में जिस तरह स्टाफ नर्स का पदनाम नर्सिंग ऑफिसर कर दिया गया है, उसी तरह फार्मासिस्ट का फार्मेसी अधिकारी व मुख्य फार्मासिस्ट का मुख्य फार्मेसी अधिकारी पदनाम किया जाए। उन्होंने सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा व एडीएम जयभारत सिंह को ज्ञापन देते हुए कहा कि मांगें पूरी न होने पर सोमवार से दो घंटे का कार्य बहिष्कार व आठ मई से स्वास्थ्य महानिदेशालय में क्रमिक अनशन किया जाएगा। वहां पर जिला अध्यक्ष बीएन बेलवाल, मंडलीय सचिव डीके जोशी, अनूप रावत, आरडी कांडपाल, आरएस अधिकारी, आरएस चौहान, पीएस राना, जीपी मिश्रा आदि थे। इधर, उत्तराखंड फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय आह्वान पर शुक्रवार को पांचवें दिन एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय काशीपुर और सीएचसी बाजपुर में फार्मासिस्ट ने काले फीता बांधकर विरोध जताया। चीफ फार्मासिस्ट मुकेश कुमार ने बताया कि प्रांतीय आह्वान पर 16 मांगों के लिए काले फीते बांध कर शांतिपूर्वक आंदोलन किया जा रहा है। मांगे पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।