फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udham Singh Nagar News: निजी अस्पताल में प्रसव के बाद महिला मौत

Fri, 06 Oct 2023 01:05 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
विज्ञापन
मृतका नैंसी की फाइल फोटो।
विज्ञापन
काशीपुर। निजी अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत हो गई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। महिला ने मंगलवार को ऑपरेशन से एक बेटी को जन्म दिया था। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
विज्ञापन

मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली नैन्सी (26) का विवाह लगभग एक वर्ष पहले वार्ड नंबर 2 मोहल्ला चौधरियान, तहसील जोया, जनपद अमरोहा हाल निवासी खड़कपुर देवीपुरा थाना आईटीआई निवासी हरदीप सिंह के साथ हुआ था। हरदीप बाजपुर रोड स्थित एक फैक्टरी लेबर कांट्रेक्टर है। तीन दिन पूर्व प्रसव पीड़ा होने पर हरदीप ने अपनी पत्नी नैन्सी को बाजपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। बताया जाता है कि मंगलवार की रात ऑपरेशन से नैन्सी ने एक बेटी को जन्म दिया। जो पूरी तरह स्वस्थ है। प्रसव के बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ने लगी। परिजनों के ने बताया कि अस्पताल के चिकित्सकों का कहना था कि उसे खून की कमी है। परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल में नवविवाहिता के इलाज में चिकित्सकों ने लापरवाही बरती है।
बुधवार की रात लगभग नौ बजे उनको अस्पताल के कर्मियों ने बताया कि नैन्सी की तबीयत नाजुक हो गई है। उसे इलाज के लिए अन्यत्र ले जाओ। परिजन जब तक अस्पताल पहुंचे, तब तक नैंसी की मौत हो चुकी थी। उन्होंने जब इस बारे में अस्पताल के स्टाफ से जानकारी लेने का प्रयास किया, आरोप है कि अस्पताल स्टाफ मौके से फरार हो गया। विवाद कि सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई और आक्रोशित परिजनों को शांत कराया। बृहस्पतिवार को परिजनों की मांग पर पुलिस ने वीडियोग्राफी के बीच मृतका नैन्सी के शव का डॉक्टर के पैनल ने पोस्टमार्टम कराया।
विज्ञापन


मृतका का डॉक्टर के पैनल से पोस्टमार्टम करवाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो सकेंगे। फिलहाल महिला के परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।- आशुतोष कुमार सिंह, आईटीआई थाना प्रभारी
ऐसे मामले में परिजन पहले सीएमओ को शिकायत करेंगे। डॉक्टर के पैनल की रिपोर्ट के बाद ही पुलिस कोई कार्रवाई कर सकती है। पीड़ित पक्ष आरोप लगाता है लेकिन कार्रवाई नियमानुसार ही होती है। - अभय सिंह, एसपी काशीपुर।

अप्रशिक्षित डॉक्टर की दवा लोगों पर पड़ रही भारी
काशीपुर। क्षेत्र में अप्रशिक्षित चिकित्सकों की दवा जनस्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रही है। कई बार तो सस्ते इलाज के चलते लोगों की जान तक पर बन जाती है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता है। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते क्षेत्र के गली-मोहल्ले के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अप्रशिक्षित चिकित्सकों ने अपने क्लीनिक खोल लिए हैं। जो बिना किसी जांच के पीड़ितों को दवा दे रहे हैं।

ऐसे दर्जनों मामले अब तक हो चुके हैं, बावजूद इसके विभाग का मौन रहना कहीं न कहीं जन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। जब पीड़ित परिजन हंगामा करते हैं तो विभाग भी ऐसे क्लीनिक या अस्पताल को सील करने तक सीमित रहता है और लोगों का आक्रोश शांत कर देता है। विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के चलते यह लोग दोबारा अन्य जगह नाम बदल कर दोबारा से लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने लगते हैं। क्षेत्र में ऐसे कई क्लीनिक हैं जो सील होने के कुछ महीनों बाद नए नाम से अपना कारोबार शुरू कर चुके हैं।



सील करने के बाद भी खुल गए कई अस्पताल-

जसपुर खुर्द स्थित संडे मार्केट के पास एक निजी अस्पताल में अनियमितता मिलने पर सील किया गया था। जिसे बाद में नाम बदलकर खोल लिया गया।



-अलीगंज रोड पर एक निजी अस्पताल में एक महिला की मौत के बाद हंगामा होने रक अस्पताल को सील किया गया था। कुछ समय बाद उक्त अस्पताल को दोबारा खोल लिया गया था।

- मुरादाबाद रोड अनाज मंडी के पास ही एक अस्पताल में भारी अनियमितता मिलने पर उसे स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच के बाद सील कर दिया था।



- मुरादाबाद रोड पर ढेला पुल के पास एक निजी अस्पताल की स्वास्थ्य विभाग टीम ने जांच की थी। जहां मानक के विपरीत स्टाफ और डॉक्टर ट्रेंड नहीं होने पर सील कर दिया था। जो अब पुन: शुरू हो गया।

केस हिस्ट्री

केस नंबर -(1) जसपुर के मोहल्ला नईबस्ती निवासी एक युवक ने अपनी डेढ़ वर्षीय बेटी को बीमार होने पर तीन दिन पहले बाजार पुलिस चौकी के नजदीक खुले एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया था। डॉक्टर ने बच्ची में खून की कमी बताई थी। वह पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची को खून चढ़ाकर उसका इलाज शुरू किया। बुधवार को बच्ची की मौत होने पर परिजन ने 112 पर डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। बच्ची के परिजन निजी अस्पताल के डॉक्टर पर इलाज में अनियमितता आरोप लगा रहे थे।



केस नंबर - (2) नगर निगम क्षेत्र के हिम्मतुपर निवासी अमरजीत सिंह की 14 वर्षीय बेटी हिमांशी को बुखार इसके बाद टायफाइड की शिकायत हो गई थी। जिसका क्षेत्र के एक झोलाछाप डॉक्टर से इलाज चल रहा था। इसी दौरान एकाएक उसे उल्टी-दस्त की शिकायत हो गई। तब परिजन छात्रा को बाजपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। बताया जाता है कि डॉक्टर ने छात्रा की हालत देखते हुए उसे अन्य कहीं दिखाने को कहा। तब परिजन उसे गिरीताल स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टर ने अस्पताल में जगह नहीं होने की बात कहकर भर्ती करने से मना कर दिया। इस दौरान छात्रा की मौत हो गई।



केस नंबर - (3) बाजपुर में एक हैल्थ वर्क ने अपना अस्पताल खोल लिया था। जानकारी के मुताबिक मार्च 2023 में उस अस्पताल में ग्राम खमरिया निवासी एक महिला का गर्भपात कराया गया था। जहां उसकी मौत हो गई थी। तब परिजनों ने हंगामा काटा था। इसके बाद परिजनों की तहरीर के आधार पर अस्पताल के पांच जिम्मेदार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था।



केस नंबर - (4) लगभग एक वर्ष पहले क्षेत्र निवासी एक महिला को प्रसव के लिए जसपुर खुर्द स्थित संडे मार्केट के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। केस बिगड़ने पर जज्जा-बच्चा को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया था। जहां नवजात बच्चे की मौत होने पर परिजनों ने हंगामा काटा था। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उक्त अस्पताल को सील कर दिया था। तब जांच में पाया गया था कि उक्त नर्सिंग होम एक विशेषज्ञ डॉक्टर के नाम से संचालित किया जा रहा था।




अप्रिशिक्षत डॉक्टर की जांच के लिए जिले के सरकारी अस्पतालों के प्रभारियों को अधिकृत किया गया है। शिकायत मिलने पर वह जांच कर कार्रवाई करते हैं। बिना पंजीकरण कराए कोई भी न तो अस्पताल खोल सकता है न ही क्लीनिक। विभाग समय-समय पर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करता है। जो भी कार्रवाई की जाती है वह नियमानुसार ही होती है। डॉ. मनोज शर्मा, सीएमओ ऊधमसिंह नगर।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें