अपराध की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले ऊधमसिंह नगर जिले में सैकड़ों नाबालिग भी जरायम की दुनिया में कदम रख चुके हैं। इसमें से कुछ किशोर गलत संगत में पड़कर अपराधी बने हैं तो कुछ को बड़े अपराधियों ने कैरियर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया है। किच्छा में किशोरों से स्मैक तस्करी करवाने का मामला इसका ताजा उदाहरण है। बीते तीन साल में जिले भर में हुई आपराधिक वारदातों में करीब 200 से अधिक किशोर भी घटना में शामिल पाए गए हैं।
किशोरावस्था में जहां बच्चे अपने भविष्य की नींव रखते हैं, वहीं ऊधमसिंह नगर जिले के सैकड़ों किशोर उम्र की इस दहलीज पर जरायम की दुनिया में कदम रख चुके हैं। पुलिस विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 से 2018 तक जिले में हुई आपराधिक वारदातों को अंजाम देने में 207 नाबालिग भी शामिल हैं।
इन्होंने तस्करी, हत्या, लूट, डकैती और अपहरण जैसी बड़े वारदातों को अंजाम दिया है। अपराधों में जिले के काशीपुर क्षेत्र से 37, रुद्रपुर से 30 और सितारगंज से 27 किशोरों के शामिल होने के रूप में इन थानों में सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। किशोरों की इस क्राइम फैक्ट्री से अब स्मैक तस्करी के लिए भी उन्हें कैरियर के रूप में इस्तेमाल करने का खुलासा रविवार को एसटीएफ और किच्छा थाना पुलिस की ओर से किया गया है।
दरुऊ स्थित आम के बगीचे में स्मैक की ‘फसल’
रुद्रपुर। यूपी की सीमा से लगे किच्छा के दरुऊ क्षेत्र में स्मैक का कारोबार खुलेआम चलता है। यहां 14 और 16 फुट का ‘एंगल’ मांगते ही स्मैक की छोटी और बड़ी पुड़िया थमा दी जाती है। इस पूरे नेटवर्क का संचालन क्षेत्र की एक महिला कर रही है। स्थानीय किशोरों और युवाओं को उसने एजेंट बना रखा है। उनके जरिये वह ग्राहकों तक आसानी से स्मैक पहुंचा देती है। सूत्रों के अनुसार महिला को यूपी और उत्तराखंड पुलिस के कुछ कर्मचारियों का संरक्षण भी प्राप्त है। यूपी की पुलिस चौकी टांडा छंगा और उत्तराखंड की कुरैया पुलिस चौकी के बीच स्थित आम के बगीचे से स्मैक का पूरा कारोबार संचालित होता है। दरुऊ में स्मैक के कारोबार का स्टिंग कर अमर उजाला ने 21 अगस्त 2017 के अंक में खुलासा किया था लेकिन इसके बाद भी पुलिस प्रशासन नहीं चेता।
दरुऊ में फरमूद और अजमद जैसे कई नशे के सौदागर
शनिवार रात को एसटीएफ और किच्छा थाना पुलिस की ओर से पकड़ा गया समद अली स्मैक कारोबार का एक छोटा प्यादा है। इससे पहले उसके पिता फरमूद जैसे बड़े सौदागरों को भी पुलिस पकड़कर जेल भेज चुकी है। किच्छा में ही साल भर में पकड़े गए स्मैक कारोबार के आंकड़े देखें तो किच्छा पुलिस की ओर से अब तक कुल 661.93 ग्राम स्मैक बरामद कर नौ तस्करों को गिरफ्तार करने के साथ ही तस्करी के 33 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। इनमें से चार बरेली, दो रामपुर, एक हरिद्वार और दो रुद्रपुर के तस्कर है। इसमें असलम पठान, राजा, सानू और अनस वांछित फरमूद के रिश्तेदार हैं। स्मैक तस्करी में जेल में बंद यूपी के रिफाकत का भी यहां बड़ा नेटवर्क है और इन्हीं की शह पर यूपी से स्मैक लाने के बाद दरुऊ से ही इसकी फुटकर बिक्री पूरे जिले में की जाती है।
स्मैक का बरेली कनेक्शन तोड़ने की तैयारी में एसटीएफ
जिले में अब तक पुलिस और एसटीएफ की ओर से बरामद की गई स्मैक की खेप यूपी के बरेली से लाई गई है। इसे देखते हुए अब एसटीएफ स्मैक कारोबार के बरेली कनेक्शन को तोड़ने की योजना बना रही है। दरअसल स्मैक अफीम से तैयार की जाती है। अफीम का सबसे बड़ा कारोबार झारखंड और पंजाब में होता है। इन क्षेत्रों से अफीम मंगाकर तस्कर यूपी में इसमें केमिकल मिलाने के बाद स्मैक तैयार कर उसकी सप्लाई करते हैं।
साढ़े 11 माह में जिले से डेढ़ किलो स्मैक बरामद
नशा कारोबार के खिलाफ अभियान चलाते हुए पुलिस और एसटीएफ ने एक जनवरी 2018 से 15 दिसंबर तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 1.524 किलोग्राम स्मैक बरामद की है। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये है। इसमें से सबसे अधिक स्मैक किच्छा क्षेत्र से ही बरामद की गई है।
इनसेट
वर्ष 2016 से 18 तक किशोर अपराधियों की थानावार सूची
काशीपुर 37
रुद्रपुर 30
सितारगंज 27
गदरपुर 22
खटीमा 17
पंतनगर 14
किच्छा 13
कुंडा 09
बाजपुर 08
दिनेशपुर 05
ट्रांजिट कैंप 07
नानकमत्ता 06
कुल 207
नोट-- आबकारी एक्ट, मारपीट, शांति भंग, हाइवे जाम, और नशाखोरी में भी सैकड़ों नाबालिगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।