जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मियों की गतिविधियां तेज हो रही हैं, वैसे ही ऊधमसिंह नगर जिले पर असामाजिक तत्वों की भी निगाहें पैनी हो रही हैं। जिले में माहौल खराब करने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं, लेकिन इस दिशा में पुलिस अभी तक कोई बड़ी तैयारी नहीं कर पाई है। पिछले एक महीने की बात की जाए तो लगातार रुद्रपुर शहर में ही फिजा खराब करने की तीन बार कोशिश हो चुकी है। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी असामाजिक तत्व सक्रिय हो गए हैं, जो पुलिस को भी चुनौती दे रहे हैं।
इन सभी मामलों को गंभीरता से देखते हुए डीआईजी कुमाऊं अजय रौतेला भी सतर्क हो गए हैं। अपने स्तर पर डीआईजी ने खुफिया विभाग की एक बड़ी टीम असामाजिक तत्वों की हरकतों पर लगा दी है। रौतेला भी मानते हैं कि कुछ लोग शांत जिले में अपनी नापाक हरकतें करने की कोशिश में हैं। उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। वहीं कुछ सफेदपोशों पर भी खुफिया विभाग की निगाहें गड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यूपी के सीमावर्ती जिलों को जोड़ने वाले चोर रास्तों पर पुलिस फोर्स तैनात की जाएगी। साथ ही जिले की सीमाओं पर पुलिस का पहरा सख्त कर दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त फोर्स भी मांगी जाएगी।
13 और 14 सितंबर को जसपुर से लेकर रुद्रपुर तक असामाजिक तत्वों ने अपने नापाक इरादों से शहर में फिजा खराब करने की कोशिश की। पुलिस ने अपनी मुस्तैदी के साथ हर बार असामाजिक तत्वों के मंसूबों को ध्वस्त कर दिया। वहीं बृहस्पतिवार को रुद्रपुर के आरटीओ नंबर की एक पिकप को भी पुलिस ने अपने कब्जे में लिया और इसमें 10 क्विंटल गोवंशीय मांस पाया गया। इस दौरान आरोपी मौके फरार हो गए हैं। अब जब चुनावी माहौल बनने लगा है और ऊधमसिंह नगर जिला अतिसंवेदनशील माना जाना लगा है। ऐसे में पुलिस को और सक्रिय होना पड़ेगा।
पिकप मालिक की हो रही जांच
रुद्रपुर। बृहस्पतिवार को जिस पिकप में गोवंशीय मांस पकड़ा गया था, वह रुद्रपुर आरटीओ से पंजीकृत है। पुलिस अब उसके मालिक की पड़ताल कर रही है। इसी से पता लग पाएगा कि आखिर रामपुर से पिकप में लदा मांस रुद्रपुर किसकी डिमांड पर आ रहा था। पुलिस यह भी पड़ताल कर रही है कि पिकप यूपी के सीमावर्ती क्षेत्रों में कब-कब आती और जाती है। डीआईजी कुमाऊं अजय रौतेला ने कहा कि पिकप के नंबर और उसके असली मालिक के साथ-साथ कौन से आपराधिक तत्व जुड़े हैं, इस पर भी पुलिस का पूरा फोकस है।
सिपाही बसंत बोरा की गो तस्करों ने की थी हत्या
गदरपुर के महतोष मोड़ स्थित यूपी के सीमावर्ती चोर रास्ते से 12 और 13 दिसंबर 2015 की रात करीब ढाई बजे जब गदरपुर थाने में तैनात दो सिपाही गश्त पर थे तो उन्हें गो तस्करों की सूचना मिली। पीछा करने के दौरान तस्करों ने बाइक सवार सिपाहियों पर पिकप चढ़ा दी थी। इससे सिपाही बसंत बोरा की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि एक सिपाही जितेंद्र कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया था। इतनी बड़ी घटना के बाद भी गदरपुर पुलिस गंभीर नहीं हुई। हालांकि इसमें सभी हत्यारोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए थे जो कि अभी जेल में बंद हैं।
खुराना ने लिया था तस्करों से लोहा
तत्कालीन एसएसपी केवल खुराना ने गोतस्करों के हाथों मारे गए सिपाही बसंत बोरा की मौत के बाद उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और दिन रात तस्करों की धरपकड़ के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। खास बात यह भी थी कि यूपी के मुरादाबाद की पुलिस इस मामले में अपराधियों को बचाने की पूरी कोशिश में थी, लेकिन कप्तान खुराना ने तस्करों से लोहा लेते हुए उन्हें सलाखों के पीछे धकेलने के बाद ही दम लिया था। इसमें उन्होंने शहीद सिपाही बसंत बोरा के बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा भी अपने कंधों पर लिया।