नशे के खिलाफ अभियान चलाते हुए ट्रांजिट कैंप थाना पुलिस ने एक किलोग्राम चरस के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गये दोनों तस्कर यूपी से चरस की खेप लाकर सिडकुल कर्मियों को बेचते थे। इससे पूर्व भी इन तस्करों ने सिडकुल क्षेत्र में चरस की सप्लाई की है।
शुक्रवार की शाम सिडकुल थाना प्रभारी एमपी सिंह के वाहन चालक हर्षवर्धन पंत को मुखबिर से सूचना मिली कि फुलसुंगा सिडकुल रोड पर दो युवक चरस बेचने आने वाले हैं। एसआई आनंद गिरी ने पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की घेराबंदी कर बाइक पर सवार दो युवकों को पकड़ लिया। तलाशी लेने पर दोनों युवकों के पास से 500-500 ग्राम चरस बरामद हुई। आरोपियों ने अपना नाम ग्राम मुड़िया डलाल थाना बरखेड़ा जिला पीलीभीत निवासी विक्रम सिंह और मकान नंबर 46 अडाना थाना भूता तहसील फरीदपुर जिला बरेली निवासी हरीश कुमार बताया है। बताया कि उन्होंने बरखेड़ा थाना क्षेत्र पीलीभीत से 18 हजार रुपये में चरस खरीदी और सिडकुल क्षेत्र में इसे 60 हजार में बेचने की योजना थी। थाना प्रभारी एमपी सिंह ने बताया कि दोनों पहले भी सिडकुल क्षेत्र में चरस की सप्लाई दे चुके हैं। पूछताछ में तस्करों ने कुछ और नामों का खुलासा भी किया है। जल्द ही उन्हें भी पकड़कर चरस तस्करों के बड़े गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है। दोनों के पास से बरामद चरस और बाइक को सीज कर जेल भेज दिया गया है। टीम में एसआई होशियार सिंह, कांस्टेबल कुलदीप सिंह, नीरज शुक्ला और उमेश पंत भी शामिल थे। एसपी देवेंद्र पिंचा ने टीम को 1500 रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की है।
सिडकुल में काम करते करते शुरू कर दी तस्करी
रुद्रपुर। थाना ट्रांजिट कैंप पुलिस द्वारा पकड़े गये चरस तस्कर विक्रम और हरीश ने तीन माह पहले ही चरस तस्करी का काम शुरू कर दिया था। उस दौरान विक्रम सिडकुल की डयूक्स कंपनी में और हरीश जेकशन पाल कंपनी में काम करता था। पहली बार दोनों ने बरखेड़ा से 250 ग्राम चरस लाकर सिडकुल कर्मियों को बेची थी। इसमें उन्हें छह हजार का फायदा हुआ था। कम मेहनत और कम समय में कमाई गई छह हजार रुपये की रकम ने ही उन्हें चरस तस्करी के दलदल में धकेला। हरीश ने बीटेक और विक्रम ने दसवीं तक शिक्षा ग्रहण की है।
फुटकर में श्रमिकों को बेचते थे चरस
रुद्रपुर। सिडकुल क्षेत्र में पुलिस द्वारा पकड़े गये दोनों चरस तस्कर यूपी से थोेक में चरस लाकर उसे फुटकर में सिडकुल कर्मियों को बेचते थे। इसके लिए सबसे पहले दोनों ने अपने साथ काम करने वालों को ग्राहक बनाया और नये ग्राहक बनाने के लिए दो बार कंपनी भी बदल दी। सिडकुल में काम करने वाले पहाड़ी क्षेत्र के श्रमिक इनके अधिक निशाने पर रहते थे। इसके साथ ही कुछ ट्रक चालकों को भी दोनों ने अपना ग्राहक बनाया था।