एनसीईआरटी की पुस्तकें बेचने को लेकर दुकानों का निरीक्षण करने पहुंची शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन की टीम के साथ व्यापारियों ने बदसलूकी की। टीम को निरीक्षण करने से रोकते हुए बंधक बनाने की कोशिश भी की गई। एक दुकान में भीतर टीम के घुसते ही शटर गिरा दिए गए। पुलिस की मौजूदगी में टीम के साथ अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल किया गया। हंगामे से बाजार में जाम के साथ ही अफरातफरी की स्थिति बनी रही। इसके बाद टीम को निरीक्षण अधूरा छोड़कर लौटना पड़ा। पूरा हंगामा करीब दो घंटे तक चला।
सीईओ डॉ. पीएन सिंह, डीईओ (बेसिक) रवि मेहता, एसडीएम युक्ता मिश्रा, उप शिक्षा अधिकारी गुंजन अमरोही पुलिस फोर्स के साथ बृहस्पतिवार दोपहर करीब दो बजे बाजार क्षेत्र में पहुंचे। टीम को शिकायत के आधार पर बाजार में करीब पांच दुकानों का निरीक्षण करना था। टीम मुख्य बाजार स्थित विनोद पुस्तक भंडार में निरीक्षण करने पहुंची और दुकान स्वामी से एनसीईआरटी की किताबें दिखाने को कहा। इस पर वहां मौजूद कुछ अभिभावकों ने भी महंगी किताबें बेचने की शिकायत कर डाली। दुकान स्वामी ने कहा कि निजी स्कूल संचालक उन्हें किताबों की सूची लिखकर देते हैं, लिहाजा स्कूलों पर कार्रवाई की जाए। सूचना मिलने पर कुछ और व्यापारी भी वहां पहुंच गए और विरोध जताया। व्यापारियों ने हंगामा करते हुए पुलिस फोर्स की मौजूदगी में टीम के साथ अभद्रता कर दी।
करीब आधे घंटे के निरीक्षण के बाद टीम दुकान स्वामी को चेतावनी देकर पास ही स्थित अरोरा स्टेशनर्स में निरीक्षण करने पहुंची। तभी कुछ व्यापारी दौड़कर दुकान के गेट पर खड़े हो गए और टीम को गेट पर ही रोक दिया। करीब 15 मिनट तक गेट पर हंगामे के बाद टीम निकल गई। एक व्यापारी नेता ने कहा कि सिर्फ दो शिक्षा अधिकारी ही दुकान में पहुंचकर दुकान स्वामी से बात कर सकते हैं। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी और एसडीएम व्यापारियों की चेतावनी की परवाह किए बगैर दुकान के भीतर घुस गए। इससे भड़के कुछ व्यापारियों ने दुकान के शटर अंदर से बंद कर टीम को बंधक बनाने की कोशिश की, लेकिन अधिकारी किसी तरह बाहर निकल आए। व्यापारियों के विरोध के चलते अन्य दुकानों का निरीक्षण नहीं हो सका। इधर, निरीक्षण के दौरान एक व्यापारी अपना आपा खो बैठा और अधिकारियों से लेकर वहां मौजूद लोगों के साथ गालीगलौज पर उतर आया।
कोट - विनोद पुस्तक भंडार के स्वामी का कहना है कि आरएएन पब्लिक स्कूल, एमिनिटी और रेनबो पब्लिक स्कूल की ओर से अभिभावकों को निजी पब्लिकेशन की पुस्तकें खरीदवाने को कहा जा रहा है। इसी वजह से उन्हें (दुकान स्वामी) किताबें बेचनी पड़ रही हैं। दुकान स्वामी के बयान के आधार पर इन स्कूलों को नोटिस भेजा जा रहा है। अरोरा स्टेशनर्स में भी ऐसी ही स्थिति मिली।
- डॉ. पीएन सिंह, मुख्य शिक्षा अधिकारी।
कोट - टीम को पुस्तकों की दुकानों के निरीक्षण से रोकना गलत और गंभीर बात है। इस पर कार्यवाई को लेकर मंथन किया जा रहा है। जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।
- युक्ता मिश्रा, एसडीएम।
डीईओ ने मोर्चा संभाला
रुद्रपुर। शिक्षा विभाग और प्रशासन की टीम को निरीक्षण करने से रोकने के खिलाफ डीईओ (बेसिक) रवि मेहता भी व्यापारियों के खिलाफ मोर्चे पर आ गए। व्यापारियों की भीड़ के बावजूद उन्होंने हौसला नहीं खोया। अरोरा स्टेशनर्स में टीम को न घुसने देने के बाद वे हिम्मत दिखाते हुए दोबारा दुकान में निरीक्षण के लिए को घुस गए। व्यापारियों की ओर से विरोध में शटर गिराने के बावजूद वह दुकान में एनसीईआरटी की पुस्तकों का निरीक्षण करते रहे। निरीक्षण के दौरान पुलिस कर्मियों का पर्याप्त सहयोग न मिलने के बावजूद उन्होंने साहस का परिचय दिया।
कुछ भाजपा नेता दुकानदारों के समर्थन में आए
रुद्रपुर। दुकानों में निरीक्षण के दौरान व्यापारियों के साथ कुछ भाजपा नेता भी दुकानदारों के समर्थन में नजर आए, जबकि राज्य में भाजपा सरकार स्वयं इस अभियान को चला रही है। खासकर भाजपा विधायक एवं शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के विशेष निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है।
कई गुना महंगी हैं निजी पब्लिकेशन की किताबें
रुद्रपुर। उत्तराखंड में फ्री फी रेग्यूलेशन एक्ट लागू न होने से राज्य में स्कूल संचालकों की मनमानी चल रही है। एनसीईआरटी और निजी पब्लिकेशन हाउस की किताबों में आठ से नौ गुना महंगी हैं। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने सत्र 2018-19 से एक से लेकर 12वीं कक्षा तक एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद निजी स्कूल संचालक मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं।
एनसीईआरटी और निजी पब्लिकेशन की किताबों में अंतर
कक्षा
आरटी निजी प्रकाशक
कक्षा एक - 230 रुपये 1700 रुपये
कक्षा दो से तीन - 300 रुपये 1700-2400 रुपये
कक्षा चार से आठ 300-850 रुपये 4600-6200 रुपये
नवीं से 12वीं तक 1050-1130 रुपये 6800-8500 रुपये