पंतनगर तराई बीज विकास निगम में तैयार किए गए गेहूं बीज को ठिकाने लगाने में गोदामों तक बीज सप्लाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों और ट्रक चालकों की भी अहम भूमिका है। योजना निकलने के बाद बीज टीडीसी से निकला, लेकिन ट्रक चालकों ने उसे गोदामों की बजाय पहले से तैयार किए गए खरीदारों तक पहुंचा दिया। अब कई चालकों का सुराग नहीं मिल रहा तो कई ट्रांसपोर्टरों के पास बीज सप्लाई करने का हिसाब नहीं है।
वर्ष 2015-16 में टीडीसी गेेहूं बीज खरीद के नाम पर हुए 16 करोड़ रुपये के घोटाले में बीज सप्लाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों और गोदामों में बीज पहुंचाने वाले ट्रक चालक भी बड़े राजदार हैं। सूत्रों के अनुसार बीज के नमूने फेल होने के बाद कर्मचारियों ने बीज बेचने के लिए डेढ़ क्विंटल बीज पर आधा क्विंटल बीज देने की योजना निकाली और ट्रक टीडीसी से बिहार के लिए बीज लेकर रवाना हुए। लेकिन, बीज गोदामों तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में उन खरीदारों को सौंप दिया गया, जिनसे नमूने फेल होने के बाद बीज का सौदा किया गया था।
ट्रक चालक आधे रास्ते में ट्रक की पलटी कर लौट गए। कागजों में एक ट्रक दो दिन में दो बार टीडीसी पंतनगर से बिहार पहुंच गया, जबकि इतने कम समय में इतनी दूरी तय करना संभव नहीं हैं। साक्ष्य मिलने के बाद एसआईटी ने ट्रांसपोर्टरों की जांच पड़ताल की, लेकिन मामला दो वर्ष पुराना होने के कारण कुछ ट्रक चालक मिले नहीं। इसके अलावा ट्रांसपोर्टरों के पास बीज सप्लाई करने का रिकॉर्ड नहीं है। माल ले जाने वाली कुछ गाड़ियां दो से तीन बार बिक चुकी हैं, जिससे उनके असली मालिक की जानकारी जुटाना एसआईटी के लिए चुनौतीपूर्ण है। माना जा रहा है कि ट्रक चालकों के मिलने पर घोटाले के अहम सुराग मिल सकते हैं।
बरेली, फरुखाबाद में नहीं हो पाई जांच
टीडीसी बीज घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को बिहार की जांच के बाद महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं, लेकिन बरेली और फरुखाबाद की जांच में कुछ अड़चनें आई हैं। बरेली में वर्ष 2015-16 में बीज वितरण करने वाले वितरक का निधन हो गया है तो फरुखाबाद का वितरक एसआईटी को मिल नहीं पाया। वहीं गोरखपुर, बनारस और पश्चिम बंगाल में बीज की बिक्री नहीं हुई है।
बिहार में लाइन लगाकर लेते थे टीडीसी का बीज
पंतनगर टीडीसी के बीज की गुणवत्ता के कारण बिहार, पश्चिम बंगाल के साथ ही यूपी में भी टीडीसी का बड़ा बाजार था, लेकिन वर्ष 2015-16 में बीज का नमूना फेल होने के कारण इसके बाजार पर भी फर्क पड़ा। बताया जा रहा है कि इससे पूर्व बिहार में टीडीसी का बीज लेने के लिए बिहार में लाइन लगानी पड़ती थी।
घाटे से उबरने को दो बार गिराए रेट
टीडीसी को वर्ष 2015-16 में देश भर से बीज की काफी अधिक डिमांड मिली थी, लेकिन बीज का नमूना फेल हो गया। 85 हजार क्विंटल बीज के घाटे से उबरने के लिए टीडीसी ने तीन हजार प्रति क्विंटल से रेट गिराकर बीज के दाम 2350 रुपये क्विंटल कर दिया। फिर भी बीज नहीं बिकने पर बीज के दाम 1533 रुपये कर योजना भी लागू की और यहीं पर घोटाला हो गया। जबकि, इस वर्ष यूपी ने अपना बीज 1600 रुपये पर क्विंटल के हिसाब से बेचा था।