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जाति प्रमाण पत्रों पर नोट बंदी का लगा ग्रहण

Tue, 22 Nov 2016 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
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नाोटबैन - फोटो : अमर उजाला
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पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने का असर गरीब तबके पर दोनों ओर से पड़ रहा है। पहले ही पांच सौ और एक हजार के नोट बाजार में नहीं चलने से लोग परेशान है। वहीं अब छोटे नोटों के अभाव में सरकारी काम भी नहीं हो पा रहे हैं।
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तहसील में दो वर्ष पहले तक जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोगों को लंबे समय तक कागजी कार्रवाई से जूझना पड़ता था। सरकार ने गरीबों के दर्द को समझते हुए कार्य में फेरबदल किया तो जाति प्रमाण पत्र ऑन लाइन बनना शुरू हो गए। इसका यह असर रहा कि ऑन लाइन जाति प्रमाण पत्र बनने से लोगों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ और प्रतिदिन 40 से अधिक जाति प्रमाण पत्र के आवेदन तहसील में आने लगे, लेकिन नोट बंदी के फैसले के बाद इसमें गिरावट आने लगी। दिनभर में तहसील में सिर्फ मुश्किल से दो या तीन लोग ही आ रहे हैं।

तहसील में जाति प्रमाण पत्र बनवाने और अन्य दस्तावेज बनवाने की फीस तीस रुपए है। ऑन लाइन आवेदन कराने और फीस जमा करने के दो हफ्ते के भीतर प्रमाण पत्र मिल जाता है। लेकिन नोट बंदी के बाद आम लोगों पर फैसले की मार पड़ी है। लोग जाति प्रमाण पत्र भूलकर बैंकों की लाइनों में लगने को मजबूर हैं। हालांकि कुछ गिने चुने लोग तहसील पहुंच भी रहें हैं, तो तीस रुपए खुले नहीं होने के कारण प्रमाण पत्र के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। 
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इधर तहसील में 500 और एक हजार के नोट नहीं चलने के कारण तहसील कार्यालय को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। तहसील में प्रमाण पत्र बनाने वाले कर्मचारी नकुल ने बताया कि नोट बंदी के फैसले के बाद से प्रमाण पत्र आवेदन करने वालों में भारी गिरावट आई है। इसका असर यह हुआ है कि प्रमाण पत्रों से होने वाली हजार रुपए कि आमदनी सिर्फ सौ रुपए तक सीमित रह गई है। तहसीलदार अमृता शर्मा का भी कहना है कि सरकारी आमदनी में गिरावट आई है।
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