एनएच चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में किये गये घोटाले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे हैं। अफसरों ने इस महाघोटाले में न सिर्फ भू उपयोग परिवर्तन कराकर करोड़ों का खेल किया बल्कि चौड़ीकरण की जद में आ रहे कॉमर्शियल, आवासीय भवनों के मुआवजे में भी सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगाई।
एनएच चौड़ीकरण में भूमि अधिग्रहण के नाम पर हुए महाघोटाले की सीबीआई जांच के लिए सरकार ने संस्तुति की है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की जांच की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि जांच के बाद इसमें कई और सनसनीखेज खुलासे हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने भू उपयोग परिवर्तन कराकर तो करोड़ों का घोटाला किया ही साथ ही कॉमर्शियल, आवासीय भवनों में भी बड़ा खेल किया। एनएच चौड़ीकरण की जद में कई स्थानों पर आवासीय, कॉमर्शियल भवन भी आ रहे थे।
नियमानुसार पक्के भवन तोड़ने पर बीम तक का मुआवजा देना होता है लेकिन जिन भवनों में बीम ज्यादा थे, उन भवनों की नपाई तोड़े जाने वाले हिस्से से कहीं अधिक कर दी गई। एनएच अधिकारियों ने भवन स्वामियों से साठगांठ कर भवन की माप को अधिक दर्शाकर मुआवजा स्वीकृत करा लिया। सूत्रों के अनुसार ऐसे कई प्रकरण सामने आए हैं। इसमें सर्वेयर की भूमिका संदिग्ध रही है।
सूत्रों के अनुसार ऐसी शिकायतें भी हुई थीं कि भवन स्वामियों को अधिक मुआवजा भुगतान के साथ अधिकारियों ने अपनी जेबें भी गर्म कीं। इसके बाद कुछ जगह मुआवजा संशोधित भी किया गया लेकिन जहां शिकायत नहीं हुई वहां पर सरकारी खजाने को चूना लगा दिया। मुआवजा घोटाले में हालांकि अभी जांच का फोकस भू उपयोग परिवर्तन ही रहा है, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी वैसे-वैसे भवनों में हुए मुआवजे के खेल का खुलासा होना भी तय है।
डीएम देहरादून रवाना
जिले के नये डीएम डॉ. नीरज खैरवाल शनिवार तड़के देहरादून रवाना हो गये। हालांकि उन्होंने अपनी रवानगी का कारण प्रशासनिक कामकाज बताया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि जिले में मुआवजा घोटाला प्रकरण में चल रही जांच के सिलसिले में डीएम को देहरादून बुलाया गया है। सूत्रों का कहना है कि मुआवजा घोटाले में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है, डीएम उसे भी साथ ले गए हैं और उस पर शासन में चर्चा होने की संभावना है।