दोहरे हत्याकांड में मारे गए दलजीत सिंह सोनू की अंतिम अरदास के बाद हुई बैठक में हत्यारोपियों का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि धार्मिक क्रियाकलापों के बीच हत्याकांड शर्मनाक है। मृतक दलजीत के परिजनों ने जयमल हत्याकांड के फरार तीन हत्यारोपियों से जान का खतरा होने की आशंका जताई। कहा कि तीन दिन के भीतर फरार हत्यारोपी नहीं पकड़े गए तो आंदोलन किया जाएगा।
बीती सात जनवरी को सरेबाजार जनता फार्म निवासी दलजीत सिंह सोनू और बिज्टी गांव के हरबंश सिंह की निर्मम हत्या कर दी गई थी और मृतक दलजीत का भाई रजविंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया था। पुलिस ने दड़हा गांव के मुख्य हत्यारोपी हरजीत सिंह काला समेत पांच हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जबकि एक हत्यारोपी बलजीत सिंह उर्फ जीता का रुद्रपुर के अस्पताल में इलाज चल रहा है।
सोमवार को जनता फार्म गांव में मृतक दलजीत सिंह की अंतिम अरदास की गई। अरदास के बाद सिख संगत और व्यापारी वर्ग के लोगों ने बैठक की। इसमें सिख समाज की ओर से दड़हा गांव के हत्यारोपियों का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। मृतक दलजीत के परिजनों ने कहा कि जयमल हत्याकांड में फरार हत्यारोपी मलपुरी के जगतार सिंह, दड़हा गांव के टहल सिंह और जोगा सिंह को तीन दिन के भीतर गिरफ्तार नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
परिवार की असुरक्षा देख अब सरहद पर जाने का मन नहीं होता
सितारगंज। मृतक दलजीत सिंह सोनू का चचेरा भाई पूरन सिंह बीएसएफ में सिपाही है। दलजीत के भोग में शामिल होने आए बीएसएफ सिपाही पूरन सिंह ने कहा कि परिवार की असुरक्षा देख सरहद पर जाने का अब मन नहीं होता। पूरन ने बताया कि 17 जुलाई 2015 को उनके ताऊ जयमल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई और अब उनके भाई दलजीत सिंह और बिज्टी गांव निवासी रिश्तेदार हरबंश सिंह को मार दिया गया। बकौल पूरन देश की रक्षा करें या घर की सुरक्षा। बता दें कि पूरन वर्तमान में गुजरात के भुज कच्छ में तैनात है। ब्यूरो