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एसआईटी ने घोटालेबाजों पर बढ़ाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा

Fri, 17 Nov 2017 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर। 
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रुद्रपुर एसएसपी कार्यालय के मुख्य द्वार पर एसआईटी के खिलाफ धरना देते कांग्रेसी - फोटो : amar ujala
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एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में जुटी एसआईटी ने अब घोटाले में लिप्त सरकारी और गैर सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा को बढ़ा दिया है। धारा बढ़ने से अब एसआईटी द्वारा खोले जाने वाले घोटाले संबंधी मामलों का निस्तारण नैनीताल स्थित विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार में होगा।
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मार्च-2017 में तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर डी सैंथिल पांडियन द्वारा भूमि मुआवजा घोटाले का राज खोलने के बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रताप शाह द्वारा 10 मार्च को एनएच-74 के चौड़ीकरण में कृषि भूमि को अकृषि बनाने में राजकीय धन की क्षति करने और अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ करने के संबंध में थाना पंतनगर में धारा 167, 218, 219, 420, 410, 466, 468, 471, 120बी आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था।


घोटाले में कई सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत होने के बाद अब एसआईटी द्वारा इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा को भी बढ़ाया गया है। धार बढ़ने के बाद अब अब एसआईटी द्वारा घोटाले के संबंध में खोले जाने वाले मामलों का निस्तारण नैनीताल स्थित विशेष भ्रष्टाचार न्यायालय में किया जाएगा। इससे काफी हद तक मामलों के निस्तारण में तेजी जाएगी। वहीं, काशीपुर और जसपुर तहसील के बाद अब रुद्रपुर और गदरपुर तहसील में हुए घोटाले की जांच के लिए एसआईटी ने बृहस्पतिवार को कोषागार के डबल लॉक से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज लिए हैं। जसपुर तहसील से आये तीन काश्तकारों से भी एसआईटी ने गहनता से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए।
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पूर्व मंत्री बेहड़ ने कहा, बड़ी मछलियों को बचा रही एसआईटी
एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच कर रही एसआईटी के खिलाफ बृहस्पतिवार को पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने एसएसपी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर एसआईटी पर घोटाले में लिप्त बड़े अफसरों और सफेदपोश नेताओं को बचाने का आरोप लगाया है। अपने सर्मथकों के साथ एसएसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे बेहड़ का आरोप था कि एसआईटी अपनी जांच के नाम पर सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर शिकंजा कस रही है, जबकि बड़े अधिकारी और कुछ सफेदपोश नेता एसआईटी की जांच के दायरे में शामिल ही नहीं है।


उनका कहना था कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खुद सीबीआई को घोटाले की जांच सौंपने की बात कही थी, लेकिन अब वह ही अपनी बात से मुकर गए हैं। आरोप है कि बाजपुर तहसील में सबसे अधिक घोटाला हुआ है, लेकिन एसआईटी ने अभी तक उसकी जांच शुरू नहीं की है। साथ ही किच्छा और रुद्रपुर तहसील पर भी एसआईटी की नजर नहीं जा रही है। बेहड़ ने चेतवानी दी कि यदि 15 दिन के भीतर एसआईटी बाजपुर और अन्य तहसीलों की जांच शुरू नहीं करती तो वह भूख हड़ताल पर बैठने के साथ ही क्रमिक अनशन करने को बाध्य होंगे। प्रर्दशन करने वालों में हरीश पनेरु, जगदीश तनेजा, संजय जुनेजा, अनिल शर्मा, हिमांशु गाबा, दलजजीत सिंह, मोहन खेड़ा, हरीश बावरा, पुष्कर जैन, ममता हलधर और मीना शर्मा आदि थे।


बाजपुर तहसील की जांच एसआईटी कर रही है। अन्य तहसीलों में भी निष्पक्ष जांच हुई है। घोटाले में लिप्त हर किसी के खिलाफ एसआईटी कार्रवाई करेगी। चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल में शामिल हो। जांच प्रकिया काफी जटिल होने के कारण समय लग सकता है, लेकिन घोटाले में लिप्त हर किसी को जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा।
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डा. सदानंद दाते, एसएसपी यूएस नगर
 
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