एनएच-74 में टोल प्लाजा शिफ्टिंग के नाम पर मोटा मुआवजा लेने के लिए तैयार किए गए फर्जी दस्तावेजों के मामले में एसआईटी पांच किसानों के हस्ताक्षर के नमूने जांच के लिए एफएसएल भेजने की तैयारी कर रही है। इन किसानों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे। एसआईटी इन किसानों से पूछताछ के बाद बयान दर्ज कर चुकी है। इधर, गदरपुर तहसील के जमीनों के आठ संदिग्ध मामलों के दस्तावेज भी जांच को एफएसएल भेजे जा रहे हैं।
चार मार्च को एसआईटी के निरीक्षक एनबी भट्ट ने किच्छा कोतवाली में जेल में बंद पीसीएस अफसर डीपी सिंह, एलाइड इंफ्रा की एमडी प्रिया शर्मा और निदेशक सुधीर चावला के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। तीनों पर आरोप था कि उन्होंने टोल प्लाजा की जमीन का मोटा मुआवजा हासिल करने के लिए चुटकी देवरिया के काश्तकार सतनाम सिंह, कुलवंत कौर, नरेंद्र कौर, बाबू सिंह और ज्ञान कौर से 5.348 हेक्टेयर जमीन का इकरारनामा किया था। इन खसरों की कृषि भूमि का वर्ष 2013 में थ्री ए और 2014 में थ्री डी होने के बाद अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हो गई थी।
लेकिन डीपी सिंह ने वर्ष 2016 में काश्तकारों का फर्जी हस्ताक्षरों से प्रार्थना तैयार कर एनएचआई को छह हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से भुगतान करने के लिए पत्राचार किया था। एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि किसानों ने बयान में प्रार्थना पत्रों में उनके हस्ताक्षर होने से इनकार किया है। लेकिन उनके हस्ताक्षर के नमूनों को जांच के लिए एफएसएल भेजा जाएगा। इसके अलावा गदरपुर के आठ संदिग्ध मामलों के दस्तावेज भी एफएसएल भेजे जा रहे हैं।