सात वर्षीय बच्ची पूनम की मौत के बाद भी न तो लोग सुधरे, न ही प्रशासन जागा। सोमवार को जब अमर उजाला की टीम ने क्षेत्र का जायजा लिया तो अधिकांश निर्माणाधीन भवनों के सेफ्टी टैंक खुले पाए गए। भवन स्वामियों की ये लापरवाही कई और जानें ले सकती हैं।
बीते रविवार को टांडा उज्जैना, माझा कालोनी निवासी रामपाल की सात वर्षीय पुत्री पूनम खेलते-खेलते पड़ोस में निर्माणाधीन मकान के सेफ्टी टैंक में गिर गई। जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि सुप्रीम कोर्ट आदेश दे चुका है कि बोरवेल और सेफ्टी टैंकों को खुला न छोड़ा जाए। लेकिन लोग लापरवाह बने हुए हैं। कई भवन स्वामियों ने लंबे समय पहले भवन की फाउंडेशन बनाकर भरान तो करा दिया। लेकिन सेफ्टी टैंक को ढकने के कोई इंतजाम नहीं किए। जबकि इनके आसपास आबादी है और सुबह-शाम बच्चे खेलते हैं। लेकिन इन भवन स्वामियों के साथ ही प्रशासन को भी बच्चों की जान की कोई परवाह नहीं है। लोगों का कहना है कि सेफ्टी टैंक खुले पाए जाने पर भवन स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।