अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) ने वर्ष 2008 में रुपये के लेनदेन को लेकर हुए सचिन बंसल हत्याकांड में दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास और सात-सात हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मुकदमे के एक अभियुक्त की मौत हो चुकी है, जबकि एक अन्य को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है। अदालत ने साक्ष्य छिपाने और आर्म्स एक्ट के मुकदमे में दोषियों को अलग-अलग सजा सुनाई है।
क्या था मामला
मोहल्ला गंज निवासी पुनीत कुमार ने सात अक्तूबर 2008 को कोतवाली में अपने भाई सचिन की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। अगले दिन रामनगर रोड पर एक निजी स्कूल के पास सचिन का शव बोरी में पड़ा मिला। उसके शरीर पर तेज धारदार हथियारों के निशान थे। हत्याकांड में पुलिस ने मोहल्ला ओझान निवासी नीरज और गंज निवासी मुकेश को गिरफ्तार किया था।
इसके बाद पुलिस ने ओझान निवासी कोमल सैनी और टांडा बादली (रामपुर) निवासी हरिओम को रोडवेज के पास से गिरफ्तार किया था। हत्या में प्रयुक्त चाकू और तमंचा भी बरामद कर लिया गया। दोषियों ने क बूल किया था कि सचिन की हत्या कर उसका शव बोरे में डालकर लोहे के संदूक में रखकर फेंक दिया था।
सचिन हत्याकांड : 30 अप्रैल 2009 को दाखिल किया गया आरोप पत्र
काशीपुुर। सचिन हत्याकांड में एडीजे न्यायालय में 30 अप्रैल 2009 को दोषियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वादी पुनीत, पवन कुमार, नितिन छाबड़ा, उपनिरीक्षक केआर आर्य, अमरचंद्र शर्मा, पीडी जोशी समेत कुल 14 गवाहों को परीक्षित कराया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता संतोष नकवी ने पैरवी की।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक आरोपी नीरज की मौत हो गई। दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली का अवलोकन कर एडीजे (द्वितीय) ओम कुमार ने दो आरोपियों मुकेश और कोमल को हत्या करने का दोषी पाते हुए उन्हें आजीवन कारावास और सात-सात हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। तीसरे आरोपी हरिओम को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने साक्ष्य छिपाने के आरोप में तीन वर्ष व चाकू रखने के आरोप में एक वर्ष के कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई है।
झांकी का रूप देकर शव शोभायात्रा में घुमाते रहे
काशीपुर। मोहल्ला गंज निवासी सचिन की हत्या मोहल्ला ओझान स्थित एक मकान में की गई थी। घटना के दिन मां मनसा देवी की शोभायात्रा निकाली जा रही थी। अभियुक्तों ने पूछताछ में कबूला था कि शव ठिकाने लगाने के लिए उन्होंने एक ठेला सजाया। उन्होंने शव बोरे में रखकर एक संदूक में बंद कर दिया। इसके बाद संदूक ठेले पर रख दिया।
उन्होंने ठेले को बतौर झांकी मनसा देवी की शोभायात्रा में शामिल कर दिया। वे मां के डोले के साथ ठेला लेकर चामुंडा मंदिर होते हुए रम्पुरा से निझड़ा जाने वाली रोड पर पहुंचे। वहां उन्होंने एक स्कूल के सामने शव फेंककर ठेला और संदूक एक बाग में फेंक दिया। उनकी निशानदेही में पुलिस ने साक्ष्य छिपाने में प्रयुक्त ठेला और संदूक बरामद किया था।