जिला प्रशासन की हीलाहवाली के चलते गर्मी के मौसम में बढ़ने वाली आग की घटनाओं पर रोकथाम के लिए अग्निशमन विभाग पूरी तरह लाचार हो रहा है। रुद्रपुर फायर स्टेशन के अंतर्गत आने वाले हाइड्रेंट में से अधिकांश जमींदोज हो गए हैं और नये प्रस्तावों पर भी जल संस्थान अपनी मुहर नहीं लगा रहा है। इससे अग्निशमन विभाग को सीमित संसाधनों से ही काम चलाना पड़ रहा है।
गर्मी के मौसम में अगर आपके आसपास कहीं आग लग जाती है तो इससे निपटने के लिए आप खुद ही तैयार रहें क्योंकि सीमित संसाधनों के कारण हर आग पर काबू पाना अग्निशमन विभाग के लिए टेढ़ी खीर हो सकता है। रुद्रपुर फायर स्टेशन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में 27 हाइड्रेंट लगे हैं लेकिन इनमें से 15 हाइड्रेंट खराब हैं। मात्र 12 हाइड्रेंटों के सहारे ही विभाग को आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
विभाग द्वारा पुराने हाइड्रेंटों को दुरुस्त करने के साथ ही नई आवासीय कॉलोनियों में 16 नये हाइड्रेंट लगाने का प्रस्ताव जल संस्थान को भेजा गया है, लेकिन जल संस्थान इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर नहीं लगा रहा है। जल संस्थान की मानें तो हाइड्रेंट लगाने के लिए उन्हें अलग से बजट नहीं मिलता, इससे वह हाइड्रेंट नहीं लगा पाता।
वर्तमान में विभाग के पास आग पर काबू पाने के लिए 16 बड़ी गाड़ियां, 7 मिनी वाटर टैंक, सात फायर फाइटिंग बाइकें तो हैं लेकिन हाइड्रेंट के अभाव में यह भी कम पड़ रही हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो अगर उन्हें सभी क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में हाइड्रेंट मिल जाएं तो हर घटना पर आसानी से काबू पाया जा सकता है।
रुद्रपुर फायर स्टेशन के अंतर्गत आने वाले 27 में से 15 हाइड्रेंट जमीनों में दब गये हैं। नये 16 हाइड्रेंटों के लिए जल संस्थान को प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। इससे विभाग को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर पर्याप्त मात्रा में हाइड्रेंट स्थापित कर दिए जाएं तो किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी।
- हरीश गिरी
फायर सर्विस ऑफिसर, रुद्रपुर।
तंग गलियां आग बुझाने में बाधक
आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए जहां अग्निशमन विभाग संसाधनों के लिए लाचार हैं, वहीं शहर की तंग गलियां भी विभाग की राह में रोड़ा बनती हैं। शहर में कई ऐसी तंग गलियां हैं, जहां आग बुझाने के लिए फायर विभाग की बड़ी गाड़ियों का जाना संभव नहीं है और अगर आग बड़ी हो तो छोटी गाड़ियों से काम नहीं चलता। और छोटी गाड़ियों में बार-बार पानी भरकर लाना भी संभव नहीं हो पाता।