द्वितीय अपर एवं जिला सत्र न्यायाधीश ओम कुमार ने मोहल्ला काजीबाग निवासी रफीक उर्फ गटुआ हत्याकांड के दोनों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
मोहल्ला काजीबाग निवासी रफीक उर्फ गटुआ पुत्र वाहिद हुसैन 4 नवंबर 2011 की शाम रतन सिनेमा रोड पर एक ठेले के पास चाट खा रहा था। इस दौरान अज्ञात लोगों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। हत्या का कारण एक वाहन की खरीद को लेकर लेनदेन का विवाद बताया गया था। मृतक के भाई मो. उमर की तहरीर पर पुलिस ने मुरादाबाद के थाना डिलारी के ग्राम कुरी निवासी नईम और ग्राम बांसखेड़ा निवासी कासिम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
मुकदमे की विवेचना तत्कालीन कोतवाल जेपी जुयाल ने की थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचे बरामद कर लिए थे। अभियोग पत्र दायर होने पर इस वाद का परीक्षण द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर विवेचना अधिकारी जेपी जुयाल, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. कैमाश राणा समेत 10 गवाह परीक्षित कराए गए।
बचाव पक्ष की ओर से पैरवी अधिवक्ता शैलेंद्र मिश्रा ने की। घटना में प्रयुक्त गोली को परीक्षण के लिए विधि प्रयोगशाला भेजा गया। रिपोर्ट में तमंचों से चले कारतूस मृतक के शरीर से बरामद गोली से भिन्न होना पाए गए। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परिशीलन कर एडीजे ओम कुमार ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।