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युवाओं को जीने की राह दिखा रहा ओएसटी

Sun, 22 Oct 2017 12:04 AM IST
अरुण कुमार /अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
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drug injection
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नशे की लत में पड़कर बर्बाद हो रहे युवाओं को ओएसटी जिंदगी की नई राह दिखा रहा है। अब तक 16 युवा ऐसे है, जिन्होंने ओएसटी में उपचार के बाद नए सिरे से जिंदगी की शुरुआत की है। समाज के लिए मिसाल बने ऐसे युवा अब दूसरे लोगों को भी नशे से बचने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
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एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल में 27 अगस्त 2013 को ओएसटी (प्रतिस्थापन चिकित्सा पद्धति) केंद्र स्थापित किया गया था। इंजेक्शन से नशा करने वालों को इससे मुक्ति दिलाने के लिए यहां मुफ्त दवा (ब्यूप्रोनॉफिन) खिलाई जाती है और मरीज की काउंसिलिंग भी की जाती है। सितंबर 2017 तक यहां 143 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। हर रोज केंद्र पर 87 मरीज दवा खाने आते हैं। ओएसटी के कर्मचारी परिधि (एनजीओ) की मदद से घर-घर जाकर जागरूकता अभियान भी चलाते हैं।

ओएसटी काउंसलर नीता पंत ने बताया कि केंद्र खुलने से अब तक 16 मरीज पूरी तरह से नशा छोड़ चुके हैं। पहले कोई भी घटना होने पर पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए पकड़ ले जाती थी, जबसे मरीज ठीक होने शुरू हुए तबसे पुलिस का इन पर दबाव भी कम हो गया है। इंजेक्शन से नशा करने वाले मरीजों और उनके परिवार वालों को जागरूक करने के लिए जगह-जगह जागरूकता कैंप लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि जो मरीज ठीक हुए हैं, उनके परिवार में भी खुशी की लहर है। 
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तीन माह से एएनएम का पद खाली
ओएसटी के जिला कार्यक्रम अधिकारी शशिकांत ने बताया कि केंद्र पर मेडिकल ऑफिसर, काउंसलर, डाटा मैनेजर, एएनएम के पद स्वीकृत हैं। तीन महीने से एएनएम का पद रिक्त है। इससे केंद्र पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को दवाई खिलाने में दिक्कतें हो रही है। उन्होंने बताया कि तैनाती के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

थाना साबिक निवासी राशिद (34) पुत्र इदरीश कहते हैं कि वह 12 साल की उम्र से नशा करते थे। स्मैक से शुरू किया था इसके बाद नशे की लत बढ़ती गई। वह इंजेक्शन लगाकर नशा करने लगे। परेशान होकर परिवार वाले उन्हें ओएसटी केंद्र पर लाए। केंद्र पर पहली बार दवा खाने के बाद उनके जीवन में सुधार आया। वह आठ माह से दवा खाने आते हैं। अब वह दूसरे लोगों को भी नशा छोड़ने के लिए जागरूक करते हैं।

 विजय नगर निवासी मरीज मंजीत सिंह की मां मंदीप कौर ने बताया कि उनका एक ही बेटा है। वह पांच साल से कैप्सूल, स्मैक से लेकर इंजेक्शन तक पहुंच गया। वह खाना भी नहीं खाता था और घर पर भी नहीं आता था। उन्हें अस्पताल में किसी ने ओएसटी केंद्र के बारे में बताया था। अब वह नौ महीने से लगातार दवाई खिलाने अपने बेटे को लेकर आती हैं। अब उनका बेटा पूरी तरह ठीक हो गया है।

मोहल्ला अल्ली खां निवासी परवेज अहमद (42) पुत्र जुबेर अहमद कहते हैं कि 2008 से नशा करते थे। घर बर्बाद होने लगा तो उनके परिजनों ने ओएसटी से इलाज शुरू कराया। 2011 से दवा खाने के लिए वह रोज आते हैं। अब उनकी हालत सुधर गई है। उन्हें केंद्र की ओर से पीयर बनाया गया है। उनको तीन हजार रुपये महीने वेतन भी मिलता है। इससे उनका परिवार चलता है।

सुल्तानपुर पट्टी निवासी जावेद (23) पुत्र खुर्शीद अहमद ने बताया कि वह एक साल से ओएसटी से लगातार दवाई खा रहा है। पांच साल से स्मैक से लेकर इंजेक्शन लगाने तक का नशा किया। वह खाना भी नहीं खाता था और घर पर भी नहीं जाता था। जब से दवाई खाने लगा तब से जिंदगी सुधर गई और शरीर भी स्वस्थ्य है।
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