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देहरादून के कैदी की खुली जेल में मौत

Tue, 03 Jan 2017 11:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
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संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। इससे जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। कैदी रात को बैरक में सोया था और सुबह अचेतावस्था में पड़ा मिला। मृतक कैदी के परिजनों का पता न चलने से हल्द्वानी पुलिस ने शव को कस्टडी में लेकर एसटीएच के पास स्थित मोर्चरी में रखा है। वहीं, जेल प्रशासन मृतक कैदी के परिजनों की तलाश में जुट गया है।
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सोमवार रात संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में आजीवन कारावास की सजा काट रहा डालनवाला देहरादून निवासी तेज सिंह रावत (55) पुत्र स्व. दौलत सिंह अपने बैरक में सोया था। मंगलवार सुबह करीब सात बजे जेल का कर्मचारी कैदियों को जगाने गया तो तेज सिंह बैरक से नहीं उठा। इस पर उसने जेल अधीक्षक टीडी जोशी को मामले की जानकारी दी। जेल अधीक्षक जोशी और जेलर जयंत पांगती बैरक पहुंचे और कैदी को अचेतावस्था में पड़ा देख फार्मासिस्ट को बुलाकर उसका परीक्षण कराया। फार्मासिस्ट ने उसे हल्द्वानी के डा. सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

इस पर जेल प्रशासन उसे हल्द्वानी एसटीएच ले गया। यहां डाक्टरों ने तेज सिंह को मृत घोषित कर दिया। कैदी की मौत के बाद जेल प्रशासन ने उसके परिजनों से संपर्क साधने का प्रयास किया। लेकिन, परिवार के किसी भी सदस्य और रिश्तेदार का पता नहीं चला। इस पर जेल अधीक्षक जोशी ने हल्द्वानी पुलिस को मामले से अवगत कराया। हल्द्वानी पुलिस ने शव को कस्टडी में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया है। जेल अधीक्षक जोशी ने बताया कि मृतक के माता-पिता का देहांत हो चुका है। परिवार के लोगों का पता लगाया जा रहा है। बुधवार को मृतक का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। अगर, परिजनों का पता नहीं चला तो जेल प्रशासन की ओर से उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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पत्नी की मौत पर मिली थी उम्रकैद की सजा
डालनवाला देहरादून के रहने वाले कैदी तेज सिंह रावत को जिला एवं सत्र न्यायालय देहरादून से दहेज के लिए पत्नी की हत्या करने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा मिली थी। मृतक 16 वर्ष से अधिक की सजा भुगत चुका था। उसकी सजा माफी की फाइल भी शासन में लंबित थी।
जेल विभाग के अनुसार तेज सिंह रावत का विवाह देहरादून के तीरथ सिंह नेगी की पुत्र सुषमा से तीन जून 1996 को हुआ था। शादी को एक माह बाद 16 जुलाई 1996 को सुषमा की मौत हो गई। 

ससुरालियों ने तेज सिंह पर बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित कर उसे मार देने का आरोप लगाते हुए डालनवाला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इस पर डालनवाला थाना पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 304बी एवं 3/4 दहेज अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था। देहरादून जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले में सुनवाई करते हुए तेज सिंह को दोषी मान 26 फरवरी 1998 को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। तब से तेज सिंह जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा था। 

तेज सिंह के आचरण में सुधार आने पर फरवरी 2005 में उसे देहरादून से यहां की संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में शिफ्ट किया गया था। जेलर जयंत पांगती ने बताया कि तेज सिंह 16 वर्ष से अधिक की सजा काट चुका था। उसकी सजा माफी के लिए शासन में फाइल लंबित चल रही थी। आईजी जेल ने भी बीते दिनों जेल भ्रमण के दौरान सजा माफी के आवेदक कैदियों की लिस्ट में उसका नाम लिया था।

मिलने आने वाला भाई निकला पड़ोसी 
संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में मिलने के लिए भाई बनकर उसका पड़ोसी एकाध बार जेल आया था। जेल के रजिस्टर में पड़ोसी का नाम और मोबाइल नंबर उसके भाई के रूप में दर्ज है। जेल अधीक्षक टीडी जोशी ने बताया कि तेज सिंह रावत से जेल में कोई मिलने नहीं आता था। एकाध बार उसका भाई आया था। रजिस्टर उसके भाई का नाम और मोबाइल नंबर निकालकर जब उसे कॉल किया तो उसने तेज सिंह का भाई न होने की जानकारी दी। उसने बताया कि वह तेज सिंह का पड़ोसी है। तेज सिंह के परिजन और रिश्तेदारों का पता किया जा रहा है। 
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