विजलेंस टीम के छापे से दबाव में आए रिश्वत मांगने का आरोपी मंडी निरीक्षक इंद्र बहादुर चंद ने मंगलवार को नैनीताल स्थित भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया। कोर्ट ने उसे 19 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
मंडी का लाइसेंस बनवाने के लिए आढ़ती पुरुषोत्तम अग्रवाल से इंद्र बहादुर चंद ने आठ हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। 21 अगस्त को इंद्र बहादुर ने अवकाश पर होने के कारण अपने साथी निरीक्षक भुवन गोस्वामी से पैसा लेकर आढ़ती को लाइसेंस देने के लिए कहा था।
विजिलेंस ने बगवाड़ा मंडी में छापामारी कर भुवन गोस्वामी को गिरफ्तार कर इंद्र बहादुर के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। विजिलेंस की कार्रवाई से बचने के लिए इंद्र बहादुर के भूमिगत हो गया। विजिलेंस ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर गैर जमानती वारंट हासिल किया।
उसकी धरपकड़ के लिए विजलेंस की टीम ने रुद्रपुर बगवाड़ा मंडी, किच्छा, खटीमा और बनबसा में उसके ठिकानों पर दबिश दी। पता चला कि आरोपी नेपाल की तरफ भाग गया है। विजलेंस टीम कुर्की उद्घोषणा का आदेश हासिल करने के लिए प्रार्थनापत्र तैयार कर रही थी। विजलेंस के एसपी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी इंद्र बहादुर चंद ने आत्मसमर्पण कर दिया है।
अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इस मामले में दोनों आरोपी अब जेल में है।
घूस मांगने के आरोप में फरार चल रहे मंडी निरीक्षक इंद्र बहादुर चंद ने मंगलवार को नैनीताल की विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत में सरेंडर कर दिया है, जहां से 19 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
-पंकज उप्रेती, इंस्पेक्टर विजिलेेंस