एमएनए और सहायक अभियंता ने बिना बोर्ड के प्रस्ताव के एक जमीन को पुलिस विभाग के हवाले कर दिया। यह मामला मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंच चुका है। सीएम ने जिलाधिकारी को जांच के निर्देश दे दिए हैं।
नगर पालिका ने आय में वृद्धि के लिए राजस्व ग्राम रम्पुरा में खसरा संख्या 253 मिन इंदिरा चौक पर स्व. संजय गांधी के नाम पर संजय मिल्क बार का निर्माण कराया था। यह नजूल की जमीन पर बना था। लेकिन नगर पालिका के नियंत्रण में था। 27 नवंबर 1997 में बोर्ड के समक्ष आय बढ़ाने के लिए पालिका की व्यवसायिक संपत्ति को फ्री होल्ड कराने का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव संख्या 11 को बोर्ड ने सर्वसम्मति से पास कर दिया। पालिका ने इस भूमि के राजस्व का स्वमूल्यांकन कराया। उस समय भूमि की कीमत 32,80,860 रुपए आंकी गई। इसके बाद पालिका ने राज्य नजूल नीति के तहत मूल्यांकन राशि का पांच प्रतिशत (1.64 लाख रुपए) 11 अप्रैल 2012 को कोषागार में चालान संख्या 71 के तहत जमा करा दिया। पालिका ने संजय मिल्क बार को ठेके पर दे रखा था। इसके बाद नगर निगम बन गया। इसी दौरान यह अराजक तत्वों का अड्डा बन गया। इस पर पुलिस विभाग की नजर पड़ गई। निगम बोर्ड की मंजूरी के बिना ही तत्कालीन एमएनए, सहायक अभियंता और पुलिस के मध्य भूमि पुलिस विभाग को देने का समझौता 13 फरवरी 2014 को हो गया। इसके लिए न तो बोर्ड ने अपने प्रस्ताव में संशोधन किया, न ही कोई भूमि हस्तांतरण नया प्रस्ताव लाया गया। अब इस संजय मिल्क बार पर पुलिस का ट्रैफिक कंट्रोल रूम बना हुआ है। फिलहाल यह मामला मुख्यमंत्री हरीश रावत तक पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री ने डीएम डा. पंकज कुमार पांडेय को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।