पुस्तकालय में ताला लगाते छात्र।
- फोटो : अमर उजाला
राधेहरि राजकीय महाविद्यालय में पुस्तकों की खरीद में हुए कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग को लेकर छात्र नेताओं ने पुस्तकों के कक्ष में तालाबंदी कर दी है। उन्होंने आशंका जताई है कि कालिख पुती पुस्तकों को खुर्द बुर्द करने के लिए महाविद्यालय प्रशासन कोई प्रपंच रच सकता है। यह भी संभव है कि महाविद्यालय में मंगाई जा रही नई किताबों से कालिख पुती पुस्तकें बदल दी जाएं।
पुस्तकालय के लिए मंगाई गई पुस्तकों के मूल्य पर कालिख पुती होने से महाविद्यालय प्रशासन पर अंगुलियां उठने लगी थीं। इस मामले में जांच को लेकर छात्र नेताओं के बढ़ते दबाव के बाद उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के निर्देश पर जांच करायी गई। निदेशालय से भेजी गई तीन सदस्यीय टीम ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। टीम ने कालिख पुती पुस्तकों की गिनती करने वाली टीम से भी पूछताछ की। छात्र नेताओं का आरोप है कि महाविद्यालय प्रशासन जांच को प्रभावित करने की जुगत में है।
आरोप है कि पुस्तकालय से कालिख पुती पुस्तकों को हटाकर उनके स्थान पर नई पुस्तकें रखे जाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के चलते कॉलेज में तीन हजार से अधिक नई पुस्तकें मंगाई गई है। छात्र नेताओं का आरोप है कि कई व्याख्याताओं पर नई किताबें पुस्तकालय के रिकार्ड में चढ़ाने का दबाव बनाया जा रहा है। छात्र नेताओं ने आशंका जताई है कि किताबों को खुर्द-बुर्द करने के लिए कोई प्रपंच भी रचा जा सकता है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए बुधवार को छात्र नेताओं ने उस कक्ष में अपना ताला भी ठोक दिया। तालाबंदी करने वालों में छात्रसंघ अध्यक्ष गुरप्रेम सिंह, पूर्व अध्यक्ष जसपाल सिंह जस्सी, नरेंद्र चौधरी, जगजीत सिंह हैप्पी, वासु शर्मा, राहुल कांबोज, अमिताभ सिजवाली, ललित मोहन आदि थे।
‘रचना’ के प्रकाशन दायित्व से हटे दो व्याख्याता
राधेहरि राजकीय महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका रचना के प्रकाशन को लेकर भी विवाद गहराने लगा है। छात्र नेताओं ने आरोप लगाया है कि रचना के प्रकाशन के लिए लाखों का अग्रिम भुगतान कर दिया गया है। इसके बाद से प्रकाशन समिति के सदस्य डॉ. महिपाल सिंह व डॉ. लवकुश कुमार ने प्राचार्य को पत्र लिखकर खुद को इस दायित्व से पृथक कर लिया है। उनका कहना है कि रचना प्रकाशन के संबंध में पूर्व में किए गए कार्यों से उनका कोई लेना देना नहीं है।