औद्योगिक नगरी काशीपुर नशे के शिकंजे में फंसती जा रही है। यहां नशे के विभिन्न उत्पादों की बिक्री उनके कोड नामों से हो रही है। ड्रग्स हैंडलर्स का बाकायदा नेटवर्क है। स्मैक की कीमत सोने के दाम से भी अधिक है। चरस यानी काला सोना भी 1200 रुपये तौला है।
ड्रग्स की नशीली दुनियां में नशे के उत्पादों के अलग-अलग नाम है। यहां स्मैक को पेप (पाइप), अफीम को चुनिया बेगम, चरस को अतर या काला सोना और गांजे को बालूचर के नाम से जाना जाता है। शहर के तमाम मोहल्ले में ड्रग्स हैंडलर सक्रिय है, जो पैडलर से माल खरीदकर इसके शौकीन लोगों तक पहुंचाते हैं।
यहां स्मैक फतेहगंज (बरेली) से पहुंच रही है। इसकी पुड़िया प्वाइंट में मिलती है। तीन हजार रुपये में मिलने वाली एक ग्राम (इकन्नी) स्मैक के छह प्वाइंट बनते है। एक प्वाइंट में चार लोग तीन-तीन कश खींच लेते हैं। यानि पांच सौ रुपये में चार लोग एक साथ स्मैक का मजा लेते हैं। काशीपुर में स्मैक के अलावा ज्यादा मांग पहाड़ी चरस की है। यहां चरस की खेप खटीमा, टनकपुर, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और सराईखेत से पहुंचती है। सराईखेत का माल पक्की तौल का माना जा रहा है।
चरस की चवन्नी यानि 2.5 ग्राम माल 300 रुपये में मिलता है। यानि एक किलो चरस करीब सवा लाख की है। दीपावली से शुरू होने वाले सीजन में एक हैंडलर प्रतिदिन आधा किग्रा तक चरस की सप्लाई कर देता है। एक हैंडलर ने बताया कि आजकल माल की खेप जमा की जा रही है। यहां चुनिया बेगम (अफीम) जालंधर से आती है। अक्सर ट्रक चालक अफीम के सप्लायर होते हैं। इसका बाजार मूल्य 2000 रुपये प्रति ग्राम है। देसी चरस के शौकीन इसे बालूचर बोलते है। यह 100 व 50 रुपए की पुड़िया में आसानी से उपलब्ध है।
सुल्फा शाहों का, तख्त बादशाहों का
नशेड़ी अपनी इस आदत को अध्यात्म से जोड़ने की नाकाम कोशिश करते दिखे। चरस के लती एक बुजुर्ग का कहना है कि वह जिस स्थान से जुड़े है, वहां के बाबा ने उन्हें कश मारने के लिए प्रेरित किया। बाबा कहते थे कि सुल्फा शाहों का, तख्त बादशाहों का। अर्थात सुल्फा शाहों (फकीरों) का तबर्रुक (प्रसाद) है और तख्त बादशाहों के लिए है। नशेड़ियों ने धर्मस्थलों को नशे का अड्डा बना लिया है। कुछ इसे धार्मिक आस्था से जोड़ने की कुचेष्टा करते दिखे।
नशा एक मनोवैज्ञानिक समस्या है। काउंसलिंग के जरिए रोगी के आईक्यू का मूल्यांकन कर नशे की सोच और प्रवृत्ति को बदला जा सकता है। नशा मन से होता है और इसके निवारण के लिए मन का उपचार जरूरी है। बच्चों को सकारात्मक ढंग से अनुशासित करें और बेहतर मार्गदर्शन से उन्हें खुश रखने का प्रयास करें।
-डॉ. नेहा शर्मा, मनोचिकित्सक
मामला एकः रोहन (काल्पनिक नाम) इंटर के बाद पिछले वर्ष डिग्री कॉलेज में प्रवेश लिया। साथियों की स्वच्छंदता को देखकर परिवार वालों से बाइक की जिद करने लगा। मना करने पर स्वभाव से विद्रोही हो गया और देखते ही देखते नशे की लत में पड़ गया। परिजनों द्वारा मुरादाबाद के नशा मुक्ति केंद्र में काउंसलिंग कराई जा रही है।
मामला दोः जावेद (काल्पनिक नाम)-दोस्तों के साथ रहकर शराब पीने की लत पड़ गई। धीरे-धीरे भूलने की बीमारी होने लगी। लीवर का साइज बढ़ गया। परिवार में क्लेश रहने लगा। डॉक्टर ने नशा छोड़ने को कहा। जावेद ने आठ साल पहले शराब से तौबा कर ली। अब उसके चेहरे पर पहले की तरह लालिमा है।
नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस दृढ़ संकल्पित है। पिछले दो माह में पुलिस ने अभियान चलाकर डेढ़ दर्जन से अधिक ड्रग्स पैडलरों को जेल भेजा है। काशीपुर में हालांकि कोई बड़ा सप्लायर पुलिस के हत्थे नही चढ़ा है। लेकिन रुद्रपुर में ड्रग्स स्पलायर बाबू की गिरफ्तारी का फीड बैक काशीपुर पुलिस की ओर से दिया गया था।
-राजेश भट्ट सीओ काशीपुर।