बहुचर्चित जसविंदर सिंह जस्सा मर्डर केस में फरार चल रहे आरोपी दरोगा कमल हसन की मुश्किल बढ़ गई है। कुर्की उद्घोषणा नोटिस चस्पा होने के बाद भी वह न्यायालय में पेश नहीं हुए। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सीमा डुंगराकोटी की अदालत ने आरोपी दरोगा के खिलाफ कुर्की के आदेश जारी कर दिए। कुर्की आदेश सीबीसीआईडी ने प्राप्त कर लिए हैं। वहीं इसी प्रकरण में आरोपी रहे तत्कालीन सीओ जोदराम जोशी ने शनिवार को आत्मसमर्पण कर दिया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
बता दें कि 19 अप्रैल 2015 को लालपुर क्षेत्र में दलित महिला की दुराचार के बाद हत्या कर दी गई थी। महिला की हत्या के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। शव रामेश्वरपुर में जसविंदर सिंह जस्सा के खेत से बरामद किया गया। पुलिस पर हत्याकांड के खुलासे को दबाव बढ़ा तो उसने जसविंदर सिंह जस्सा को पूछताछ के लिए उठा लिया। कलकत्ता पुलिस चौकी में पूछताछ के दौरान जस्सा की हालत बिगड़ गई जिसके बाद उसे सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जस्सा की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। धरना प्रदर्शन के बाद आखिरकार दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। इधर कुछ समय बाद मामला सीबीसीआईडी के हवाले कर दिया गया। कोर्ट से कुर्की उद्घोषणा नोटिस जारी होने के बाद दरोगा मनोज कुमार और जितेंद्र कुमार ने आत्मसमर्पण कर दिया।
शनिवार को तत्कालीन सीओ जोदराम जोशी ने भी सीमा डुंगराकोटी की अदालत में सरेंडर कर दिया। वहीं आरोपी कमल हसन द्वारा सरेंडर नहीं किए जाने पर न्यायालय ने उनकी कुर्की के आदेश जारी कर दिए हैं। सीबीसीआईडी ने कुर्की आदेश प्राप्त कर लिया है। सीबीसीआईडी के अफसरों के अनुसार एक दो दिन के भीतर आरोपी के घर की कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
राज बन गई दलित महिला की हत्या
दलित महिला की दुराचार के बाद हुई हत्या का राज आज भी रहस्य ही बना हुआ है। हत्या से पर्दा उठाने का प्रयास पुलिस ने किया भी लेकिन उसके माथे पर ही हत्या का दाग लग गया। जस्सा मर्डर केस के मामले ने इतना तूल पकड़ा कि दलित महिला की हत्या का मामला ही नेपथ्य में चला गया। इतना ही नहीं इस मामले में पुलिस कर्मियों को दोषी बनाए जाने के बाद दलित महिला हत्याकांड की जांच को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सबसे हैरत की बात तो यह है कि जिनकी अगुवाई में चले आंदोलन के दबाव में जसविंदर सिंह को उठाया गया था आज उन्होंने ही खामोशी की चादर ओढ़ी हुई है।