सिडकुल की ऑटोलाइन कंपनी में काम करते समय लोहे की चादर एक ठेका श्रमिक की गर्दन में घुस गई। आनन-फानन में उसे उपचार के लिए प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। इधर, कंपनी प्रबंधन ने घटना को दो श्रमिकों के आपस में झगड़ने का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया। ऑटोलाइन इंप्लाइज यूनियन ने आरोप लगाया है कि कंपनी में श्रमिकों से वह काम भी लिया जा रहा है, जो असल में मशीनों का है।
सिडकुल के सेक्टर 11 में स्थित आटो लाइन इंडस्ट्री लिमिटेड में छोटा हाथी वाहन की बॉडी और पार्ट्स बनाए जाते हैं। शुक्रवार की शाम प्लांट में ठेका श्रमिक देवप्रकाश (26) निवासी लालपुर अपने अन्य साथियों के साथ भारी भरकरम लोहे का फ्लोर उठा रहा था। अचानक फ्लोर का तीखा कोना उसकी गर्दन में घुस गया। इससे गर्दन में बड़ा घाव होने के साथ ही वह लहूलुहान हो गया। इसके बाद उसे कंपनी के वाहन से उपचार के लिए काशीपुर रोड के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बताया जा रहा है कि कंपनी में छह महीने से भारी भरकम सामान उठाने वाली गेंट्री खराब पड़ी है। इस वजह से श्रमिकों से सामान उठवाया जा रहा है। कंपनी के एचआर विभाग के अभिषेक ने बताया कि दो श्रमिकों के आपस में झगड़ने की वजह से घटना हुई है। कंपनी में काम होता है तो घटनाएं भी होती हैं। फिलहाल अस्पताल में भर्ती श्रमिक की हालत स्थिर है। इधर, ऑटोलाइन इम्पलाइज यूनियन के अध्यक्ष उत्तम सिंह और महामंत्री रोहित मेलकानी ने बताया कि मशीन में नियम विरुद्ध अकुशल श्रमिकों से काम कराया जाता है। यूनियन ने कई बार खराब पड़ी गेंट्री को सही करने की मांग की, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। लोहे का फ्लोर और अन्य सामान गेंट्री ही उठाती थी।
इस साल कटी चार श्रमिकों की अंगुलियां
ऑटोलाइन कंपनी में श्रमिक के साथ यह पहली घटना नहीं है। इस साल चार श्रमिक घटनाओं में अंगुलियां गंवा चुके हैं। यूनियन पदाधिकारियों ने बताया कि अभी भी 15 ऐसे श्रमिक कंपनी में न्यूनतम वेतन में काम कर रहे हैं, जिनके अंग भंग हो चुके हैं। लोडिंग-अनलोडिंग के लिए रखे गए ठेका श्रमिकों से मशीनों में काम कराया जाता है। पूर्व में यूनियन की शिकायत पर दो ठेकेदारों का अनुबंध निरस्त हुआ था। लेकिन वर्तमान में ठेकेदार के श्रमिक भी खतरनाक मशीनों में काम करते हैं। कंपनी के एचआर हेड ने व्यस्तता का हवाला देकर फोन काट दिया।