पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय मानव तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ कर महिला सहित तीन एजेंटों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से नेपाल से खाड़ी देशों को भेजने के लिए ले जाई जा रहीं छह युवतियों को मुक्त कराया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी का मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही बरामद लड़कियों को नेपाल की माइती संस्था को सौंपने की तैयारी की जा रही है।
शनिवार को सीओ कार्यालय में पत्रकार वार्ता में एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि 18 अक्तूबर को बनबसा से दिल्ली जा रही रोडवेज बस से महिला नानी माया माझी पत्नी चेरे माझी निवासी ग्राम मायनी अचाम जिला सिंधुपाल्चोक नेपाल के साथ छह युवतियों को पकड़ा था। सूचना मिली थी कि युवतियों को नौकरी के बहाने ले जाया जा रहा है। पूछताछ में नानी माझी ने बताया कि उसे युवतियों को दिल्ली पहुंचाना था और इसकी एवज में उसे मोटा कमीशन मिलना था।
नानी की निशानदेही पर पुलिस ने शुक्रवार को द्वारिका दिल्ली में छापा मारकर एजेंट सोम बहादुर पुत्र सिंघमान गोले निवासी सिंधुपाल चौक बागमती जिला काठमांडू (नेपाल) और विष्णु उर्फ लोप चंद्र पुत्र कायला लोप निवासी निर्मलवाड़ी नंबर 6 जिला परसा (नेपाल) को दिल्ली पुलिस की मदद से गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से पांच पासपोर्ट मिले हैं। इनमें से एक बरामद युवती का है। आरोपियों ने बताया कि वे नेपाल के दूरस्थ क्षेत्रों से एजेंट के मार्फत युवतियों को नौकरी के बहाने बुलाते हैं और उन्हें वीजा एंट्री पर अरब देशों को भेज देते हैं।
अंतिम समय तक युवतियों को पता नहीं रहता कि उन्हें कहां भेजा रहा है। वे 20 नेपाली युवतियों को कुवैत और दुबई भेज चुके हैं। इस काम के लिए विदेशी पार्टियों से मोटा कमीशन मिलता है।
एसएसपी डॉ. दाते ने बताया कि प्रति युवती से 30 हजार रुपये नेपाली मुद्रा में वेतन देने की बात तय की गई थी। आरोपियों से पांच नेपाली पासपोर्ट के अलावा वीजा की कापी और मोबाइल फोन बरामद हुआ है। दिल्ली पुलिस और स्पेशल सेल की मदद से गिरोह में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। टीम में एसएसआई नासिर हुसैन, एसआई गोल्डी घुघत्याल, चंदन सिंह, रमेश, यामीन, सुनीता फर्त्याल शामिल हैं।
द्वारिका के फ्लेट में भी मिलीं छह लड़कियां
पुलिस ने नानी माया माझी की निशानदेही पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली के द्वारिका स्थित फ्लेट पर छापामारी कर दो एजेंट पकड़े थे। इसी फ्लेट से सटे दूसरे फ्लेट में भी छह नेपाली युवतियां थीं। इन युवतियों को भी दूसरा गिरोह अरब देशों में भेजने के लिए लाया था। एसएसपी डॉ. दाते ने बताया कि कानूनन पुलिस युवतियों को अपने साथ नहीं ला सकती थी, इसलिए इसकी सूचना दिल्ली पुलिस और स्पेशल सेल को दी गई थी। सूचना के बाद उन्होंने युवतियों को बरामद कर लिया।
व्हाट्सएप और ईएमओ से गिरोह का संचालन
मानव तस्करी में शामिल गिरोह के सदस्य बहुत जरूरी हुआ तभी फोन पर बात करते हैं। वे पूरा नेटवर्क व्हाट्सएप पर चलाते हैं। पुलिस ने जब आरोपियों का मोबाइल जब्त कर व्हाट्सएप ग्रुप देखा तो उसमें गिरोह से जुड़े कुवैत के सलीम, ओमान के हामिद, दुबई के मंजूर के नाम सामने आए हैं। एजेंट ई-मेल के जरिए ही वीजा की कापी और अन्य दस्तावेज भेजते हैं। इसके अलावा पकड़ी गई नानी माया माझी भी केवल ईएमओ या फेसबुक मेसेंजर का ही इस्तेमाल बातचीत में किया करती थी।
एयरपोर्ट के पास किराये के कमरे में रखी जाती थी युवतियां
नेपाल से लेकर अरब देशों तक सक्रिय गिरोह में शामिल लोग बेहद शातिराना ढंग से काम को अंजाम देते हैं। नेपाल के एजेंट गरीब परिवार की लड़की को नौकरी का झांसा देते हैं। उसके हामी भरने के बाद पासपोर्ट बनाया जाता है। इस दौरान उसे दिल्ली लाकर एयरपोर्ट के समीप किराये के कमरे में रखा जाता है। जब पासपोर्ट बन जाता है तो लड़की को एंट्री वीजा से अरब देश भेज दिया जाता है। बरामद छह युवतियों में से भी केवल एक का ही पासपोर्ट बना था, जबकि पांच के पासपोर्ट बनने की प्रक्रिया चल रही थी, जिस युवती का पासपोर्ट बना था उसे कुवैत भेजा जाना था।
लड़कियां भेजने के बाद भी हर महीने मिलता है कमीशन
पुलिस की गिरफ्त में आए सोम बहादुर और विष्णु ने बताया कि एक लड़की को अरब देश भेजने की एवज में उन्हें 20 से 25 हजार रुपये मिलते हैं। इसके बाद उसकी तय तनख्वाह से भी उन्हें दो से पांच फीसदी का कमीशन हर महीने मिलता है। मानव तस्करी में कई गिरोह सक्रिय हैं। इधर, पकड़ी गई दलाल नानी माया ने बताया कि उसे महेंद्र नगर से दिल्ली तक लड़कियों को लाने के लिए प्रति लड़की दो हजार रुपये मिलते हैं।
नेपाल में वर्क वीजा पर प्रतिबंध, इसलिए भारत का सहारा
एसएसपी डॉ. दाते ने बताया कि नेपाल ने मानव तस्करी की घटनाओं के बाद महिलाओं के वर्क वीजा पर प्रतिबंध लगाया है। इसलिए तस्कर लड़कियों का पासपोर्ट बनाने के बाद दिल्ली ले आते हैं। दिल्ली से सात दिन के टूरिस्ट वीजा पर अरब देश भेजा जाता है। जब वीजा खत्म हो जाता है तो लड़कियां फिर वहीं की होकर रह जाती हैं। उन्हें किसी से मदद मांगने पर अवैध रूप से रहने के आरोप में जेल जाने का डर दिखाया जाता है। एक बार यदि लड़की अरब देश पहुंच गई तो वह फिर वापस नहीं आ पाती है। अरब देशों में ही गुमनाम हो जाती हैं। लड़कियों को काठमांडू से बस से महेंद्र नगर लाया जाता है। वहां से बनबसा के रास्ते दिल्ली और फिर टूरिस्ट वीजा से अरब देश भेजा जाता है।