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समूह में इंजेक्शन से नशा दे रहा एड्स को दावत

Thu, 30 Jun 2016 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
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ड्रग्‍स - फोटो : अमर उजाला
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नशे के इंजेक्शन शरीर में गोंदकर जिंदगी बर्बाद करने वाले हाई रिस्क ग्रुप के संपर्क में आकर अनजाने में लोग एड्स की चपेट में आ रहे हैं। एक ही सुई से समूह में नशा करने वालों में एचआईवी संक्रमण फैल रहा है। विवाहित लोगों से संक्रमण पत्नी और बच्चों में फैलने का खतरा बढ़ रहा है। चौंकाने वाली बात है कि जिलेभर की ओएसटी में उपचार कराने आए 57 लोगों में एचआईवी की पुष्टि हो चुकी है। 
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शहर के गली मोहल्ले में नशे का सामान धड़ल्ले से बिक रहा है। नशे के लिए शरीर को इंजेक्शन से गोंदने वाले ज्यादातर लोग स्मैक या चरस के आदि रहते हैं। लेकिन नशे का सामान मंहगा होने, आदत पड़ने और पैसों की कमी के चलते ये लोग इंजेेक्शन लेना शुरु कर देते हैं। कई बार तो युवा समूह में बैठकर एक ही सुई से नशा करते हैं। 

समूह में शामिल किसी नशेड़ी के एचआईवी पॉजीटिव होने के कारण बीमारी से बाकी लोगों के भी ग्रसित होने की पूरी संभावनाएं रहती हैं। मलिन बस्तियों में खासकर हाईरिस्क ग्रुप (जिस ग्रुप में एचआईवी पीड़ितों की मौजूदगी रहती है) सक्रिय हैं। नशे के लिए ग्रुपों के संपर्क में आने वाला भी एचआईवी के शिकंजे में कब आ रहा है, उसको पता भी नहीं चल पा रहा है। 
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जानकार बताते हैं कि ग्रुप में कई ट्रक चालक भी शामिल होते हैं। जो सेक्स वर्करों के संपर्क में आकर एचआईवी पीड़ित हो जाते हैं। एचआईवी पीड़ित जब किसी ग्रुप के साथ एक ही इंजेक्शन से नशा करता है, तो उससे बीमारी दूसरों में फैलने की पूरी संभावना रहती है। समूह में नशा करने वालों में एचआईवी के साथ ही हेपेटाइटिस सी बीमारी भी हो सकती है। 

हालांकि एचआईवी पीड़ित से बीमारी परिवार और सेक्स वर्कर में भी फैलने की संभावना रहती है। इसकी तस्दीक इससे भी होती है कि जिले की दो ओएसटी में नशे के इंजेक्शन की लत छुड़वाने पहुंचे करीब ढाई सौ मरीजों में से 57 एचआईवी पॉजीटिव निकल चुके हैं। इनमें से ज्यादातर समूह में नशा करने वाले और युवा हैं। 

11 लोगों की हो चुकी है मौत

नशे के इंजेक्शन से एड्स की चपेट में आए 11 लोगों की मौत भी हो चुकी है। बाकी नशेड़ी नशा छुड़वाने के साथ ही एआरटी सेंटर से दवा ले रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि नशेड़ी आर्थिक तंगी के चलते एक सिरिंज और दवा खरीद लेते हैं। बारी-बारी से हाथों में सिरिंज से दवा कीडोज शरीर में पहुंचाते हैं। एक व्यक्ति जब सिरिंज नस में चुभाता है तो निडिल के प्वाइंट में उसका बहुत थोड़ा ब्लड रुक जाता है। यही ब्लड सिरिंज के जरिए दूसरे के शरीर में पहुंच जाता है। अगर ग्रुप में कोई एचआईवी पॉजीटिव है तो अन्य नशेड़ियों को यह फैलने की संभावना रहती है।
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