आग लगने से 23 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। सूचना के दो घंटे बाद फायर ब्रिगेड पहुंची। राजस्व टीम ने नुकसान का जायजा लिया। आग से करीब साढ़े सात लाख रुपये का नुकसान होना बताया गया है। छमाही की मेहनत चंद मिनटों में खाक होने से किसान आहत हैं।
रविवार को गांव चकरपुर में गेहूं के खेत में अचानक आग लग गई। आसपास के काश्तकार आग बुझाने में जुट गए। फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी गई, लेकिन फायर ब्रिगेड घटना के दो घंटे बाद पहुंची। तब तक आग से मोहल्ला रामभवन निवासी किसान अजय कुमार, सुनील कुमार, सतेन्द्र प्रसाद, अनुराग, शैलेन्द्र कुमार, विकास कुमार के खेत में खड़ी करीब 23 एकड़ फसल जलकर राख हो चुकी थी।
मौके पर पहुंचे कांग्रेस के प्रांतीय सचिव सुभाष शर्मा ने फायर ब्रिगेड गाड़ी के देर से पहुंचने पर दमकल कर्मियों को खरी खोटी सुनाई। शर्मा का आरोप है कि आग लगने की सूचना तहसीलदार, पटवारी देनी चाही लेकिन उनका मोबाइल स्विच आफ था। शर्मा ने पीड़ित किसानों को मुआवना दिए जाने की मांग की है। इधर गांव ढाकी सिहाली में भी आग से गेहूं की फसल जलने की खबर मिली है।
अब बाजपुर में तैनान रहेगी फायर ब्रिगेड
नगर और ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ती आग की घटनाओं को लेकर काशीपुर फायर ब्रिगेड स्टेशन से बाजपुर को एक दमकल गाड़ी उपलब्ध कराई गई है। 11 अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने प्रमुखता से इस समस्या को प्रकाशित किया था। समाचार को संज्ञान में लेकर विभागीय अफसरों ने एक दमकल गाड़ी भेजी है। यह गाड़ी जून तक उपलब्ध रहेगी। फिलहाल दमकल को कोतवाली में पीछे रामलीला मैदान में मुस्तैद किया गया है।
बता दें कि 2007 में तत्कालीन एसडीएम केके निराला ने बेरिया दौलत रोड स्थित सरकारी बंजर भूमि पर फायर ब्रिगेड स्टेशन का प्रस्ताव शासन को भेजा था। उस वक्त विधायक और वर्तमान कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे ने विधायक निधि से दो कक्षों का निर्माण कराकर 23 मई 2007 को अस्थाई रुप से फायर ब्रिगेड स्टेशन का लोकार्पण किया था, लेकिन शासन स्तर से फायर ब्रिगेड स्टेशन की स्वीकृति नही मिली। तभी से मामला शासन स्तर पर लंबित पड़ा है। बाजपुर तहसील क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय पेप्पी कंपनी, पॉलीप्लेक्स, रेडिको खेतान, तीन सरिया फैक्ट्री के अलावा सीडस प्लांट, पेपर इत्यादि उद्योग हैं। आग लगने पर काशीपुर से दमकल मंगाई जाती है।