एनएच-74 भूमि मुआवजे घोटाले के मुख्य आरोपी डीपी सिंह के जेल जाने के बाद अभी भी उसकी कारगुजारियां उजागर हो रही हैं। किच्छा में तहसीलदार रहने के दौरान डीपी पर काश्तकार को डरा धमकाकर उसकी संपत्ति हड़पने का मामला सामने आया है। एसआईटी ने काश्तकार के प्रार्थना पत्र की जांच शुरू कर दी है।
एसआइटी को दिए बयान में ग्राम बगवाड़ा निवासी काश्तकार सुरेंद्र अरोरा का कहना है कि वर्ष 2001-02 में उसने गांव की अपनी जमीन पर मकान और दुकान का निर्माण कराया था। इसी जमीन पर उसने बैंक से 10 लाख का ऋण लेकर आटे का प्लांट लगाया था। करीब चार साल बाद प्लांट बंद हो गया और ऋण की किस्त टूट गई थी। वर्ष 2006 में बैंक से उसकी आरसी किच्छा तहसील में पहुंची थी। उस वक्त डीपी सिंह किच्छा में तहसीलदार थे। बैंक की आरसी प्राप्त होने के बाद डीपी ने उसके मकान को हड़पने की साजिश रची और उसके पास ऋण जमा करने के लिए कोई नोटिस नहीं भेजा गया।
उस पर ऋण चुकाने के लिए उस पर मकान बेचने का दबाव बनाया गया। परेशान होकर वह घर छोड़ कर चला गया था। इसका फायदा उठाकर डीपी ने उसकी पत्नी को डरा धमकाकर उसके 60 लाख रुपये कीमत के मकान को मात्र 19 लाख में खरीदकर उसकी रजिस्ट्री अपनी सास विद्यावती के नाम से कर दी थी। कुछ समय बाद जब सुरेंद्र की जमीन एनएच की जद में आई तो डीपी सिंह ने जमीन पर अपनी सास के नाम से 11 लाख रुपये का मुआवजा भी हड़प लिया। बृहस्पतिवार को दिए गए सुरेंद्र के बयान के आधार पर एसआईटी ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रिया पर दर्ज हो सकता है एक और मुकदमा
रुद्रपुर। फरार चल रही प्रिया शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का एक और मुकदमा दर्ज हो सकता है। गदरपुर थाने में तैनात एक सिपाही के अनुसार उसने भी प्रिया शर्मा से पॉम ग्रीन सिटी में आठ लाख का एक प्लॉट खरीदा था, लेकिन काफी समय बाद प्रिया शर्मा ने प्लॉट की रजिस्ट्री उसके नाम से नहीं की। सूत्रों के अनुसार सिपाही की तहरीर पर पुलिस प्रिया शर्मा के खिलाफ एक और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रही है।