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फर्जी कागजों से वाहन फाइनेंस कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़

Mon, 06 Aug 2018 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो   रुद्रपुर।
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रुद्रपुर में पुलिस के गिरफ्त में आरोपी व बरामद कार। - फोटो : amar ujala
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पुलिस ने फर्जी कागजात से वाहन फाइनेंस कराकर बैंकों को चपत लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही फर्जी तरीके से फाइनेंस कराई गईं दो कारें भी बरामद की हैं। फाइनेंस कराने के लिए गिरोह की मदद कार शोरूम के फाइनेंस मैनेजर ने की थी। पुलिस गिरोह के सरगना सहित तीन आरोपियों की तलाश में जुटी है।

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रविवार को सीओ कार्यालय में एएसपी देवेंद्र पींचा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि कोतवाली में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में पुलिस आरोपी और माल की बरामदगी के लिए सुरागकशी में जुटी थी। रविवार सुबह मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने तीनपानी किच्छा रोड से विपिन कुमार चौहान निवासी ग्राम फुलसुंगी चंद्रा कालोनी ट्रांजिट कैंप को स्विफ्ट वीडीआई के साथ गिरफ्तार किया था।

आरोपी से बरामद कार फर्जी तरीके से फाइनेंस कराई गई थी। पूछताछ में विपिन ने बताया कि बैंकों से धोखाधड़ी कर वाहन फाइनेंस कराने वाले गिरोह का सरगना अन्नू गंगवार निवासी भदईपुरा है और गिरोह का सदस्य आदेश निवासी नटेरी चौकी बरा थाना सितारगंज, हॉल निवासी प्रीत विहार रुद्रपुर है।
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विपिन की निशानदेही पर आदेश के प्रीत विहार आवास से एक और स्विफ्ट कार बरामद की गई। पुलिस के आने से पहले ही आदेश घर से फरार होने में कामयाब रहा। पिंचा ने बताया कि फर्जी कागजों से वाहन फाइनेंस के धंधे में एक नामी कार शोरूम का फाइनेंस कर्मचारी राजेश कुमार भी शामिल थे।

डेढ़ महीने में राजेश की मिलीभगत से गिरोह ने एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और महिंद्रा बैकों से तीन कारें फर्जी कागजों से फाइनेंस कराई थी। राजेश ने ही पकड़े जाने की बात कहकर एक बैंक की बजाए अलग-अलग बैंकों से कार फाइनेंस कराने का आइडिया दिया था। राजेश को भी मामले में वांछित बनाया गया है।

बताया कि गिरोह के सरगना अन्नू के पकड़े जाने से कई मामले खुलने की संभावना है। टीम में कोतवाल केसी भट्ट, एसएसआई कमलेश भट्ट, जगदीश ढकरियाल, मनोज जोशी, मतलूब खान, अब्दुल मलिक शामिल रहे।  

बेहद शातिर है अन्नू गंगवार 
रुद्रपुर। फर्जी कागजों से वाहन फाइनेंस कराने का गिरोह संचालित करने वाला अन्नू बेहद शातिर है। ये लोग फाइनेंस कराए गए वाहन को थर्ड पार्टी को बेच दिया करते थे। किस्त जमा न होने पर बैंक वालों को फर्जीवाड़े की जानकारी हो पाती थी। गाड़ियां बरेली क्षेत्र में ठिकाने लगाई जाती थीं।

अन्नू के खिलाफ पूर्व में फर्जी तरीके से महंगे मोबाइल फाइनेंस कराने का भी मामला है। इसके अलावा कई और आरोप भी हैं। पुलिस को अंदेशा है कि गिरोह ने फर्जी कागजात से कईं बैंकों को चपत लगाई है। अन्नू की गिरफ्तारी के बाद इसके बारे में पता चल सकेगा।  

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