टांडा रेंज के जंगल में घास चरने गई दुधारु गाय के मुंह में बारुद का गोला फट गया, जिससे गाय का मुंह बुरी तरह जख्मी हो गया। जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए शिकारी बारुद के गोले पर आटे का लेप लगाकर जंगल में रखते हैं। आटे की खुशबु से जब कोई जानवर गोले को चबाता है तो गोला उसके मुंह में फट जाता है जिससे उसकी मौत हो जाती है।
टांडा रेंज के खसीभोज खत्ता निवासी नानू की दुधारु गाय बृहस्पतिवार सुबह पास ही के जंगल में घास चरने गई थी। गाय ने जंगल में रखा बारुद का गोला चबा लिया, जिससे उसका मुंह बुरी तरह फट गया। आसपास के लोगों की सूचना पर नानू जंगल से गाय ले आया। खत्ते में रहने वाले पशुपालक अब्दुल हफीज ने बताया गोला फटने से जानवरों की मौत का यह पहला मामला नहीं है। बीते छह माह में बारुद का गोला चबाने से 30 से अधिक जानवरों की मौत हो चुकी है।
हफीज के अनुसार शिकारी जंगली जानवरों जैसे सूअर, चीतल, खरगोश आदि का शिकार करने के लिए गोले बनाकर जंगल में रखते हैं और जानवर के मरने पर आसपास के गांवों में मांस बेचते हैं। कई लोगों की तो आजीविका ही इस पर चल रही है। शिकायत के बाद भी वन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
बारुद के गोले से आग लगने का भी है खतरा
जंगलों में जानवरों के शिकार के लिए रखे जाने वाले बारुद के गोलों से ना सिर्फ मवेशियों और वन्य जीवों की मौत का खतरा होता है, बल्कि जंगल में आग लगने का भी संकट बना रहता है। बताया जा रहा है कि बारुद का यह गोला हल्के दबाव से फट जाता है और फटने के बाद इसकी चिंगारी काफी दूर तक फैलती है। चिंगारी इतनी ज्वलनशील होती है कि सूखी लकड़ी और घास में तुरंत आग पकड़ लेती है। अगर कोई इंसान इसकी चपेट में आता है तो उसकी भी मौत हो सकती है।