पुत्रवधू को दहेज के लिए प्रताड़ित करने के आरोप में पुलिस ने कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी रहीं मुक्ता सिंह और उनके पति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दंपति का मेडिकल कराकर उन्हें अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। जमानत अर्जी खारिज होने के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
गिरिताल कॉलोनी निवासी प्रियंका पुत्री महेश सर्राफ ने 28 सितंबर को अपने पति शशांक सिंह, सास कांग्रेस नेता मुक्ता सिंह, ससुर रविंद्र सिंह, जेठ अनुराग सिंह और जेठानी दीपाली के खिलाफ दहेज के लिए प्रताड़ित करने व जबरन गर्भपात कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की विवेचना एसआई मंजू पवार को सौंपी गई थी। मुकदमा दर्ज होने के 19 दिन के भीतर ही विवेचना अधिकारी ने पीड़िता के पति के खिलाफ चार्जशीट लगाई थी। विवेचना अधिकारी ने पति को धारा 41 सीआरपीसी का नोटिस भी तामील कराया।
वादी प्रियंका ने मुकदमे के अन्य आरोपियों को क्लीन चिट देने पर एसएसपी से मिलकर शिकायत की। इस पर एसएसपी ने अपने स्तर से मामले की जांच कराई। जांच में पाया गया कि विवेचना अधिकारी ने राजनीतिक दबाव में आकर मुक्ता सिंह और अन्य परिजनों के पक्ष में अंतिम रिपोर्ट लगाई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने 16 नवंबर को विवेचना अधिकारी मंजू पवार व एसआई प्रयाग दत्त को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था।
एसएसपी ने मुकदमे की जांच विवेचना सेल के एसआई जयप्रकाश को सौंपी। जांच में कांग्रेस नेता मुक्ता सिंह और उनके पति रविंद्र सिंह को दोषी पाया गया। इसके बाद पुलिस ने मुक्ता सिंह व उनके पति रविंद्र को गिरफ्तार कर लिया। बृहस्पतिवार शाम को दंपति को एसीजेएम कोर्ट में पेश किया। अधिवक्ताओं ने उनकी जमानत के लिए कोर्ट में आवेदन किया। कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
स्कूल से निकलते समय गिरफ्तार की गईं मुक्ता सिंह
काशीपुर। मेयर चुनाव की मतगणना समाप्त होने के अगले दिन ही विवेचना अधिकारी जयप्रकाश ने कोतवाली पुलिस को कांग्रेस नेता मुक्ता सिंह व उनके पति के खिलाफ नोटिस रिसीव कराया। बृहस्पतिवार को पुलिस टीम उनकी गिरफ्तारी के लिए उनके घर कुंडेश्वरी पहुंची। पुलिस ने वहां मौजूद उनके पति रविंद्र सिंह को हिरासत में ले लिया। यहां पुलिस को पता लगा कि मुक्ता अपने स्कूल में हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने स्कूल की ओर जा रही थी। इसी बीच वह अपनी कार लेकर स्कूल से निकलती दिखाई दीं। पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया।
जांच में झूठा पाया गया जबरन गर्भपात कराने का आरोप
काशीपुर। मुक्ता सिंह की पुत्रवधू की ओर से लगाया गया जबरन गर्भपात कराने का आरोप जांच के दौरान झूठा पाया गया। विवेचना अधिकारी जयप्रकाश ने गिरफ्तारी के लिए पुलिस को जो नोटिस उपलब्ध कराया, उसमें आरोपियों के खिलाफ धारा 312 का जिक्र नहीं है यानी यह आरोप सही नहीं पाया गया। मुख्य आरोपी शशांक सिंह को पुलिस ने धारा 41 सीआरपीसी को नोटिस तामील करा दिया है, जबकि वादी के जेठ अनुराग और दीपाली के खिलाफ जांच लंबित है।
गिरफ्तारी के विरोध में कार्यकर्ताओं ने धरना
काशीपुर। दहेज उत्पीड़न में गिरफ्तार कांग्रेस नेता मुक्ता सिंह और उनके पति की गिरफ्तारी की भनक लगते ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कोतवाली पहुंच गए। उन्होंने पुलिस पर राजनैतिक दबाव में कार्रवाई करने का आरोप लगाया। पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा, मनोज जोशी आदि ने सीओ राजेश भट्ट और कोतवाल चंचल शर्मा से कार्रवाई के संबंध में जानकारी ली। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विवेचना अधिकारी की गैर मौजूदगी में पुलिस ने भाजपा सरकार के दबाव में गलत तरीके से गिरफ्तारी की है, जिसका विरोध किया जाएगा। मुक्ता सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में कार्यकर्ताओं ने कोतवाली गेट पर सांकेतिक धरना दिया और भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहां कांग्रेस महानगर अध्यक्ष संदीप सहगल, उमेश जोशी, पंकज पंत, चेतन अरोरा, विमल गुड़िया, हरीश कुमार सिंह, मुशर्रफ हुसैन, अरुण चौहान, सरित चतुर्वेदी, शोभित गुड़िया, राशिद फारूकी, जितेंद्र सरस्वती, माजिद अली, शाह आलम, जय सिंह आदि थे।
पुलिस ने दिखाई सख्ती तो शांत हुए कार्यकर्ता
काशीपुर। कार्यकर्ताओं की ओर से गिरफ्तारी मेमो पर हस्ताक्षर न करने और नारेबाजी किए जाने पर पुलिस अधिकारियों ने भी सख्त तेवर दिखाए। पुलिस अधिकारियों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कोतवाली परिसर से बाहर खदेड़ दिया। पुलिस के रुख को देख कार्यकर्ता सहम गए। कोतवाली लाई गईं मुक्ता सिंह और उनके पति की गिरफ्तारी सूचना के लिए थाने के मुंशी ने भाजपा के एक पार्षद पति के नाम से मेमो तैयार किया था। पार्षद पति उक्त दंपति का नजदीकी रिश्तेदार है लेकिन कार्यकर्ताओं ने उससे गिरफ्तारी मेमो पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इस पर पार्षद पति ने उक्त मेमो पर हस्ताक्षर नहीं किए। काफी प्रयासों के बाद भी कोई गिरफ्तारी सूचना लेने को तैयार नहीं हुआ।