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आईएएस के आदेश पर दो करोड़ का मुआवजा हुआ था साढ़े सात करोड़

Sat, 11 Aug 2018 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो        रुद्रपुर।
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घोटाला - फोटो : amar ujala
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एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में आर्बिट्रेशन के मामलों में अनियमितता मिलने के बाद एसआईटी की जांच के दायरे में आए आईएएस चंद्रेेश यादव ने एसएलओ की ओर से एक भूमि पर पारित किए गए दो करोड़ के मुआवजे को साढ़े सात करोड़ करने के आदेश दिए थे, जबकि भूमि का बैक डेट में 143 होने के कारण तत्कालीन एसडीएम ने एसएलओ को मुआवजा निरस्त करने के निर्देश दिए थे। मुआवजा भुगतान होने से पहले ही मामला पकड़ में आने से मुआवजे का भुगतान नहीं हो सका था।  
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काशीपुर तहसील के दभौरा मुस्तकम में रहने वाले एक ही परिवार के काश्तकार प्यारा सिंह, कश्मीर कौर और अमरजीत कौर के खसरे का 2015 में तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फोनिया की ओर से बैक डेट में 143 किया गया था। इसके बाद वर्ष 2016 में तत्कालीन एसडीएम ने इसे गलत बताकर तत्कालीन एसएलओ डीपी सिंह को मुआवजा रोकने का पत्र लिखा था। पत्र में जिक्र किया गया था कि पत्रावलियां अधूरी होने के साथ ही तकनीकी खामियां हैं। लिहाजा मुआवजा नहीं दिया जाए, लेकिन डीपी सिंह ने एसडीएम की रिपोर्ट को दरकिनार कर भूमि पर दो करोड़ 10 लाख का मुआवजा निर्धारित कर दिया था। 

इसके बाद भी तत्कालीन एसडीएम ने कागजों में अकृषि हुई जमीन में खेती होने का हवाला देते हुए फिर एसएलओ को पत्र भेजा था, लेकिन उसे भी दरकिनार कर दिया गया था। इधर, खातेदार ने बैक डेट में कराई भूमि पर 15 करोड़ रुपये मुुआवजा देने की मांग की थी। इसके बाद तत्कालीन डीएम चंद्रेश यादव के आर्बिट्रेशन न्यायालय में वाद दायर हुआ। यहां चंद्रेश यादव ने खातेदार की 15 करोड़ की मांग को आधा करते हुए डीपी सिंह की ओर तय किए गए मुआवजे को बढ़ाकर साढ़े सात करोड़ कर दिया, जबकि भूमि का बैक डेट में 143 होने के कारण मामला पहले से ही गलत था। लेकिन इसी दौरान एनएच घोटाले के प्रकाश में आने के कारण खातेदार को मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया। एसआईटी की जांच में इस बात की पुष्टि होने के बाद एसआईटी ने इसे भी एक आपराधिक कृत्य मानते हुए शासन को भेजी अपनी जांच रिपोर्ट में शामिल किया है।  
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काश्तकार ने खुद नहीं कराई थी 143 
रुद्रपुर। दभौरा मुस्तकम में बैक डेट में खसरे का 143 करने के मामले में एसआईटी की ओर से जांच करने के बाद एक और खुलासा हुआ कि भूमि के असली खातेदारों की ओर से उसका 143 नहीं कराया गया था। खातेदार ने एसआईटी को बयान दिए कि उनके रिश्तेदारों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर भूमि की 143 कराई। इसके बाद भी उस पर मुआवजा निर्धारण हुआ और आर्बिट्रेटर ने भी इसे अनदेखा कर दिया। 

सितारगंज के काश्तकार ने लौटाए 15 लाख 
रुद्रपुर। एसआईटी की ओर से गलत तरीके से मुआवजा लेने वाले काश्तकारों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किए जाने की खबर से किसानों में खलबली मची हुई है। एसआईटी की कार्रवाई से बचने के लिए जहां कुछ काश्तकार पूर्व में ही मुआवजे की रकम को लौटा चुके हैं, वहीं अब सितारगंज तहसील के काश्तकार इंद्रपाल ने भी शुक्रवार को 15 लाख मुआवजे की रकम वापस की है। अब तक कुल 18 काश्तकार सरकार को दो करोड़ दस लाख रुपये की रकम वापस कर चुके हैं। 
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