समिति का बकाया वसूलने गई टीम को किसान ने बेटों के साथ मिलकर पीट दिया। मारपीट में समिति के दो कर्मी चोटिल हो गए। समिति सचिव ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। शुक्रवार को दीर्घाकार सहकारी समिति की टीम कुर्क अमीन प्रमोद कुमार के नेतृत्व में बकाया वसूलने ग्राम चंदायन निवासी एक व्यक्ति के घर पहुंची थी।
प्रमोद के अनुसार उक्त व्यक्ति पर समिति का 1,06,472.50 लाख रुपये पांच से छह साल पुराना बकाया है, जो 95क से आच्छादित है। आरोप है कि बकाया रकम जमा करने की बात कहने पर उक्त व्यक्ति ने समिति कर्मियों से बदसलूकी की। विरोध करने पर उसने अपने तीन पुत्रों के साथ टीम के साथ मारपीट शुरू कर दी।
इसमें समिति कर्मी तरुण और राकेश चोटिल हो गए जबकि विजय शर्मा को भी मामूली चोट आई। टीम किसी प्रकार अपना बचाव कर लौट आई। समिति सचिव प्रमोद कुमार सैनी ने घटना की तहरीर पुलिस को सौंप दी। इधर, सूचना पर समिति संचालक मंडल के पदाधिकारी भी पुलिस चौकी पहुंच घेराव कर आरोपियों पर कार्रवाई की मांग करने लगे। पुलिस चौकी का घेराव करने वालों में देवेंद्र सिंह गहलौत, शाहनू गंभीर, बल्देव राज, मंगल सिंह, राम सिंह, विजय शर्मा, बाबू हुसैन आदि थे।
वसूली होगी प्रभावित : शर्मा
गूलरभोज। मारपीट की सूचना पर पुलिस चौकी पहुंचे सहायक विकास अधिकारी सहकारिता देवेंद्र शर्मा ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। कार्रवाई नहीं होने पर समिति की बकाया वसूली प्रभावित होगी। इधर, समिति कर्मियों से मारपीट की घटना की कार्रवाई की मांग को लेकर एक ओर संचालक मंडल बोर्ड चौकी पहुंच गया, वहीं समिति अध्यक्ष भगत सिंह धर्मसक्तू का वहां नहीं पहुंचना चर्चा का विषय रहा। हालांकि समिति सचिव ने बताया कि अध्यक्ष किसी काम से बाहर गए हुए हैं।
ढाई करोड़ के सापेक्ष मात्र छह लाख की वसूली
गूलरभोज। गूलरभोज दीर्घाकार बहुउद्देशीय सहकारी समिति क्षेत्र की बड़ी समितियों में गिनी जाती है। समिति सचिव के अनुसार इसमें कुल 42 सौ सदस्य पंजीकृत हैं। समिति का वार्षिक टर्न ओवर भी 24 करोड़ है। समिति करीब 40 लाख के लाभ में है। वहीं, कई वर्षों से बकाया जमा न करने वालों की सूची भी बढ़ती जा रही है।
समिति में पुराने बकाएदार 255 सदस्य हैं, जिन पर 95क की कार्रवाई की गई है। ऐसे किसानों पर समिति का ढाई करोड़ बकाया है। इस कार्रवाई के बाद समिति के कुर्क अमीन द्वारा ही वसूली कराई जाती है। समिति के वरिष्ठ आंकिक विजय शर्मा के अनुसार गेहूं की फसल के बाद अप्रैल से जून के बीच वसूली की जाती है, जिसमें इन किसानों से ढाई करोड़ के सापेक्ष मात्र छह लाख रुपये ही वसूले जा सके हैं। बताया गया कि कुछ किसान गेहूं की फसल के बाद तो कुछ किसान धान की फसल के बाद बकाया जमा कराते हैं।