सिडकुल की तीन फैक्ट्रियों के आंदोलित श्रमिकों ने मंगलवार को एक साथ कलेक्ट्रेट कूच कर प्रदर्शन किया। श्रमिकों ने मांगें पूर्ण नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
सिडकुल स्थित मिंडा, प्रीकॉल एवं डेल्टा फैक्ट्रियों के श्रमिक विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलित हैं। अब तक अलग अलग विरोध प्रदर्शन करके प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल रहे तीनों फैक्ट्रियों के श्रमिकों ने अब संयुक्त रूप से शोषण के खिलाफ लामबंदी कर दी है। मंगलवार को तीनों कंपनियों के सैकड़ों श्रमिक जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्ट्रेट का घेराव करते हुए प्रदर्शन किया।
श्रमिकों का कहना था कि प्रबंधन उनके शोषण पर उतारू है। बिना किसी पूर्व सूचना के कई श्रमिकों को फैक्ट्री से निकाल दिया गया है। श्रमिक जब अपने अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए आवाज उठाते हैं तो प्रबंधन उनकी आवाज को दबाने का प्रयास करता है।
श्रमिकों ने कहा कि वह शासन-प्रशासन से कई बार वार्ता कर चुके हैं लेकिन श्रमिक हित में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। इस कारण उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। श्रमिकों ने कहा कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो सिडकुल के अन्य उद्योगों के श्रमिक भी उनके समर्थन में आंदोलन शुरू कर देंगे। इस दौरान नीरज सुयाल, मदन नेगी, हरेंद्र बोरा, विनोद तिवारी, नेहा, उर्मिला, मोहित, हरजीत, पुष्कर तिवारी, महिमन सिंह, राजेंद्र संभल, राजेश कश्यप आदि श्रमिक मौजूद थे।
और बढ़ सकता है श्रमिक असंतोष
सिडकुल में औद्योगिक शांति एक बार फिर छिन्न भिन्न होती नजर आ रही है। श्रमिकों का आक्रोश यहां एक बड़े श्रमिक आंदोलन के संकेत दे रहा है। ऐसा लंबे समय बाद हुआ है कि शोषण के खिलाफ एक साथ कई फैक्ट्रियों के श्रमिक अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। प्रीकॉल, मिंडा और डेल्टा फैक्ट्रियों के श्रमिकों के असंतोष की आग सिडकुल की अन्य कंपनियों को भी झुलसा सकती है। प्रशासन ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई तो आने वाले दिनों में श्रमिकों की लड़ाई बड़े आंदोलन का रूप ले सकती हैं।