रुद्रपुर में दहेज के लिए विवाहिता को प्रताड़ित कर घर से निकालने वाले पति, सास, ससुर और देवर को कोर्ट ने सजा सुनाई है। कोर्ट ने पति और देवर को एक-एक साल जबकि सास और ससुर को छह-छह महीने की सजा मुकर्रर की है। चारों पर जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त सामान्य कारावास भुगतना पड़ेगा।
रुद्रपुर के खेड़ा निवासी सुरेंद्र प्रसाद ने 10 फरवरी 2012 को अपनी बेटी नीलम का विवाह खस्सी बाग खटीमा निवासी पंचानंद पुत्र राम प्रवेश के साथ किया था। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराली नीलम दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे थे। मांग पूरी न करने पर 18 अप्रैल 2012 को उन्होंने नीलम को पीटकर मायके छोड़ दिया। 27 जून 2012 को ससुरालियों ने दहेज का सामान देकर नीलम को वापस न भेजने के बात कहकर सभी मायके वालों के साथ मारपीट कर दी। 27 जून को नीलम ने अपने पति पंचानंद, सास सुशीला, ससुर रामप्रवेश और देवर राकेश के खिलाफ रुद्रपुर कोतवाली में तहरीर दी थी, जो दर्ज नहीं हुई।
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने छह दिसंबर 2012 को कोर्ट के आदेश पर चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर मामला अपर सिविल जज सचिन कुमार की कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट में मामले की पैरवी करते हुए नीलम के वकील गुरबाज सिंह ने गवाहों के माध्यम से नीलम के ससुरालियों के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किये। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने धारा 498 ए आईपीसी के तहत नीलम के पति पंचानंद, देवर राकेश को एक-एक साल के कारावास के साथ एक-एक हजार रुपये जुर्माना और धारा 506 आईपीसी के तहत छह-छह माह का कारावास, 500-500 रुपये जुर्माना लगाया है। सास सुशीला, ससुर रामप्रवेश को धारा 498ए आईपीसी के तहत छह-छह माह का कारावास, पांच-पांच सौ रुपये जुर्माना और धारा 506 आईपीसी के तहत तीन-तीन माह का कारावास, 500-500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।