एसडीएम ने रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप में आवंटित सरकारी आवास को निरस्त करने के आदेश स्थायी और दायित्व गृह पुनर्वासन विभाग को दे दिए हैं। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवासहीन को आवास आवंटित करने की कार्यवाही करने को भी कहा है।
बांग्लादेश से वर्ष 1975 में विस्थापित भरत मंडल को क्वाटर संख्या बी-34 आवासीय प्रयोजन के लिए किराये पर अस्थाई रूप से दिया गया था। बताया जा रहा है कि भरत की मृत्यु के बाद परिजनों ने आवास किराए पर लगा दिया और वे अन्यत्र रहने चले गए थे। ट्रांजिट कैंप के रहने वाले देवाशीष मंडल ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो पता चला कि किसी भी विस्थापित को किराए पर दिए गए आवास को जिला प्रशासन खाली करवा सकते हैं, लेकिन विस्थापित न तो आवास को बेच सकते हैं और न ही उसे किसी दूसरे को किराए पर दे सकते हैं।
भरत को आवंटित आवास किराए पर देने की शिकायत एसडीएम को मिली तो उन्होंने तहसीलदार से मामले की जांच करवाई। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि वर्तमान में आवास में सुब्रत अधिकारी निवास करता है। भरत की पत्नी ने शपथ पत्र दिया कि सुब्रत को भवन की देखरेख के लिए चाबी दी गई है। भवन के बिजली के बिल और गृहकर जमा किए जा रहे हैं। उक्त भवन के अतिरिक्त 22 भवनों को आवंटितों से शुल्क लेकर उनके नाम करने की याचिका हाइकोर्ट में दायर है।
मामले में संयुक्त मजिस्ट्रेट/एसडीएम रोहित मीणा ने भरत मंडल को दिए गए आवास को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्थायी दायित्व गृह पुनर्वासन विभाग को निरस्त किए गए आवास को अन्य आवासहीन को देने की कार्यवाही एक सप्ताह के भीतर तत्काल प्रभाव से करने के निर्देश दिए हैं।