छतरपुर बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति में वर्ष 2010 से 2016 के बीच 36 लाख रुपये के गबन हुआ है। इस मामले की जांच के लिए नवंबर 2017 में गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। जिला सहायक निबंधक ने रिपोर्ट के आधार पर समिति में तैनात तत्कालीन सचिव और मिनी बैंक प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में दोनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
छतरपुर बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति में वर्ष 2010 से 2016 तक समिति और उसके मिनी बैंक यानी ग्रामीण बैंक के खातों में वित्तीय अनियमिता के संदेह पर नवंबर 2017 में जिला सहायक निबंधक मान सिंह सैनी ने जांच के लिए कमेटी गठित की थी। सैनी ने बताया कि जांच समिति ने उक्त अवधि में छतरपुर सहकारी समिति में करीब 36 लाख रुपये का गबन होने का खुलासा किया है। सहकारी समिति और मिनी बैंक के खातों में ओवरराइटिंग और खुर्दबुर्द कर लेन-देन की रकम में हेरफेर की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार मामले में तत्कालीन समिति सचिव परशुराम और मिनी बैंक प्रभारी अवधेश की संलिप्तता पाई गई है। वर्तमान में दोनों की सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जिला सहायक निबंधक ने बताया कि वर्तमान समिति सचिव बृजेश आर्या को दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नये सचिव ने जताई थी गबन की आशंका
छतरपुर बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति में वर्ष 2016 में नरेश सचिव पद पर तैनात हुए थे। उन्होंने अपने कार्यकाल से पूर्व 2010 से 2016 तक समिति में गबन की आशंका जाहिर करते हुए जिला सहायक निबंधक से लिखित शिकायत की थी। उसके बाद ही इस प्रकरण की जांच के लिए कमेटी गठित हुई। बता दें वर्तमान में सचिव नरेश को रिश्वत से संबंधित वीडियो के वायरल होने के बाद समिति के हटाकर कैडर कार्यालय से संबद्ध किया गया है।