एनएच-74 में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है, वहीं जिला प्रशासन ने अपने स्तर से पड़ताल कर जिले के 24 कर्मचारियों को चिन्हित किया है। इसमें पटवारी से लेकर नायब तहसीलदार और तहसीलदार शामिल हैं। 24 घंटे के भीतर इन कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई तय मानी जा रही है। इससे पूर्व मामले में लिप्त छह पीसीएस अफसरों को शासन स्तर से सस्पेंड किया जा चुका है।
जिला प्रशासन की जांच में 24 कर्मचारी पूरी तरह से घोटाले में लिप्त पाए गए हैं। इनकी सूची भी तैयार की जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार नए डीएम जल्द ही इस दिशा में इन कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी में हैं। इन कर्मचारियों ने अपने अधिकारों का जमकर दुरुपयोग किया है और जमीनों के मामलों में मुआवजे के लिए जो खेल घोटालों का खेला है उनमें चिन्हित इन 24 कर्मचारियों की भूमिका सबसे ज्यादा घालमेल की पाई गई है। एक ही दिन में 143 के मामले और कई मामलों में गोलमोल रिपोर्ट तैयार करके मुआवजा का बड़ा खेल खेला गया है।
ज्यादातर यह मामला जसपुर, बाजपुर और गदरपुर तहसीलों का ही पाया गया है। इसके अलावा किच्छा तहसील में भी घोटाले का काफी खेल हआ है। सूत्रों का कहना है कि 24 कर्मचारियों की सूची तैयार होने के साथ अब इन पर सस्पेंड की कार्रवाई की तैयारी है, इसके बाद ही इन कर्मचारियों पर आगे क्या कार्रवाई होनी है यह जिल के आला अधिकारियों पर निर्भर करता है।
बता दें कि ऊधमसिंह नगर में जसपुर से खटीमा के बीच एनएच चौड़ीकरण का काम वर्ष 2011 से शुरू हुआ और इसी समय अवधि में भी एनएच चौड़ीकरण में भूमि मुआवजा का खेल अफसरों ने सांठगांठ के साथ खेला।