खटीमा। भूमि विवाद के चलते बानूसा गांव के दो पक्षों में हुई मारपीट में एक पक्ष के दो व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
वहीं, दूसरे पक्ष ने पुलिस को तहरीर सौंपकर 27 जून 1998 में खरीदी गई जमीन को जोतने, मौके पर मारपीट और फायरिंग करने, जान से मारने की धमकी देने की बात कही है। पुलिस ने बानूसा निवासी अंकित की तहरीर पर सुखदीप, संदीप, जसवंत सिंह, अमरजीत और विक्की के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस दूसरे पक्ष के सुखदीप की तहरीर पर जांच कर रही है।
सीओ कमला बिष्ट को सौंपी तहरीर में सुखदीप सिंह ने बताया कि बानूसा पचपेड़ा निवासी टहल सिंह ने अपनी पांच बीघा जमीन 28 जून 1998 को एक लाख 33 हजार रुपये में गांव के बनवारी सिंह को बेची थी। 8 जूून 2006 को बनवारी से यह जमीन दो लाख रुपये में सुखदीप और अर्जुन सिंह ने खरीद ली और दोनों आधे-आधे में खेतीबाड़ी करते थे।
सुखदीप ने कहा कि बीते रोज गांव के अजीत सिंह एवं जमीन विक्रेता टहल सिंह के बेटे वीरेंद्र ने सुखदीप का खेत जोत दिया। विरोध किया तो अजीत और वीरेंद्र ने मारपीट की और फायरिंग कर जान से मारने की धमकी दी। जबकि पहले पक्ष के अजीत सिंह के बेटे अंकित सिंह ने मारपीट में कही भी भूमि विवाद का जिक्र नहीं किया है।
उसने खटीमा से अपने घर बानूसा जाते समय मार्ग में घात लगाकर सुखदीप सहित पांचों द्वारा मारपीट कर बुरी तरह घायल कर जाति सूचक शब्दों के इस्तेमाल की तहरीर दी। जिस पर पुलिस ने पांचों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है। ढाई बीघा जमीन के बवाल में हुई मारपीट को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से कोतवाली पहुंचे।
जमीन विक्रेता के बेटे वीरेंद्र तथा उसके साथी अजीत के पक्ष ने बृहस्पतिवार रात थाने का घेराव किया। उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तारी को लेकर कोतवाली परिसर में महिलाओं के साथ धरना भी दिया। जिस पर पुलिस ने मुकदमा कायम किया। धरने में पूर्व विधायक गोपाल सिंह राणा और ब्लॉक प्रमुख दान सिंह राणा आदि भी थे।
दूसरे पक्ष ने शुक्रवार को कोतवाली का घेराव किया। वहां पर पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष कुंवर सिंह खनका, करनैल सिंह, ठाकुर सिंह जिमवाल, हरप्रीत सिंह, भाकियू के गुरुसेवक सिंह, पूर्व प्रधान खुशाल सिंह आदि थे।
बानूसा में पहले भी हुए हैं भूमि विवाद
खटीमा। बानूसा ग्राम का भूमि विवाद कोई नया मामला नहीं है। इससे पूर्व भी यहां कई भूमि विवाद जानलेवा साबित हुए हैं। तहसील क्षेत्र के रतनपुर ग्राम में हुए एक भूमि विवाद में एक फौजी सहित दो युवाओं की हत्या हुई थी। वर्ष 2012 में दो युवाओं की मौत विवादित खेत की जुताई के समय हुए खूनी संघर्ष में हुई थी। वर्ष 2016 में सूरज हत्याकांड में भी भूमि का विवाद था।
बानूसा का मामला सामने आया है इसमें किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। जो भी कानून व्यवस्था तोड़ेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फायरिंग की पुष्टि नहीं हुई है। - कमला बिष्ट, सीओ, खटीमा।