रुद्रपुर। गदरपुर के तेजा फौजा मोड़ पर शुक्रवार को दरोगा को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने का जिले में पहला मामला नहीं है। बीते तीन वर्षों में खाकी पर 48 बार हमला हो चुका है। वर्ष 2015 में तो पुलिस का एक जवान शहीद भी हो चुका है। कहीं पद और सत्ता की हनक में, तो कहीं अपना अपराध छुपाने के लिए लोग कानून के रखवालों पर ही हमला करने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।
गदरपुर में स्कूलों के बाहर छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने वाले मनचलों की धरपकड़ के लिए निकले दरोगा के साथ मारपीट से पुलिसकर्मियों में बेहद आक्रोश है। खाकी पर लगातार हमलों ने महकमे की चिंता बढ़ा दी है। कई बार अपराधी तो कई बार सियासी संरक्षण और सत्ता का गुरूर भी घटना की वजह रही है। नवंबर 2015 में गदरपुर में गौ तस्करों के हमले में कांस्टेबल बसंत बोरा की मौत हो चुकी है। अकेले बाजपुर और रुद्रपुर में ही आठ-आठ बार पुलिस कर्मियों पर हमला हो चुका है। पंतनगर थाना क्षेत्र में सात और जसपुर में चार बार हमला हुआ।
हमले के इन सभी मामलों में पुलिस की ओर से मुकदमे दर्ज किए गए, लेकिन फिर भी इस जुर्रत पर अंकुश नहीं लग रहा है। हमला करने के कारण अभियुक्तों को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की कोशिश करना, कहीं वाहन चेंकिग के दौरान पूछताछ का विरोध करना, कहीं सड़क जाम करना, कहीं अवैध खनन ढो रहे वाहनों को छुड़ाना बहुतायत में रहे हैं। इन्हीं मामलों में कई बार पुलिस के जवानों पर गाड़ी चढ़ाकर और कहीं फायरिंग कर उन्हें मारने की कोशिश भी हो चुकी है।
अक्सर आपराधिक मामलों में लिप्त लोग अपने जरायम को छुपाने के लिए पुलिस कर्मियों पर हमला करते हैं, लेकिन कई आर आम नागरिक भी असामाजिक तत्वों के बहकावे में आकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ काम करने वालों की जमात में शामिल हो जाते हैं। यदि किसी को पुलिस से शिकायत है तो वह उच्चाधिकारियों को बताए। उसकी बात सुनी जाएगी और संबंधित पर कार्रवाई भी होगी, लेकिन इस तरह से हमला कर कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
-डॉ. सदानंद दाते एसएसपी ऊधम सिंह नगर