लड़की के परिजनों से वार्ता करती डॉ. रजनीश बत्रा
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जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष और पुलिस के दखल के बाद बाल विवाह रुक गया। बाल विवाह रुकवाने के लिए चार घंटे की मशक्कत करनी पड़ी। मामला तूल पकड़ा तो गांव की सीमा से ही बारात वापस लौट गई। समिति अध्यक्ष ने परिजनों से लड़की के बालिग होने पर शादी करने का लिखित शपथपत्र लिया।
बृहस्पतिवार शाम जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ. रजनीश बत्रा को गदरपुर के ग्राम पिपलिया नंबर एक में 15 साल की किशोरी का विवाह होने की शिकायत मिली थी। इस पर उन्होंने तत्काल लड़की के स्कूल के प्रधानाचार्य से संपर्क साधकर जन्मतिथि का दस्तावेज जांचे, जिसमें उसकी उम्र 15 साल निकली।
इस पर वह लड़की के घर पहुंच गईं। वहां सब लोग बारात की स्वागत की तैयारी कर रहे थे। पूछताछ में पता चला कि किशोरी का रिश्ता गूलरभोज रोड निवासी एक 32 वर्षीय युवक से तय हुआ है। विरोध की आशंका को भांपते हुए रजनीश ने गदरपुर थाने से पुलिसकर्मियों को बुलवा लिया। रजनीश ने पहले लड़की और फिर परिजनों को कानून का हवाला देते हुए बाल विवाह नहीं करने की गुजारिश की, मगर वे मानने को तैयार नहीं हुए। उल्टा लड़की ने खुद की मर्जी से विवाह होने की बात कह दी थी।
परिजनों ने पहले सख्त और फिर नरम तेवरों में गरीबी सहित अन्य कारणों का हवाला देते हुए शादी होने देने की बात कही लेकिन रजनीश ने कानूनी कार्रवाई की बात कही तो परिजन शादी रोकने के लिए तैयार हो गए। इसके लिए रजनीश को पहले लड़की और फिर परिजनों की काउंसलिंग भी करनी पड़ी।
रजनीश ने बताया कि करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद आखिरकार नाबालिग का विवाह रुक गया था। बारात भी गांव की सीमा से ही वापस लौट गई। बताया कि शादी करवाने वाले बिचौलियों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत हुई थी। इसके बाद पुलिस भी अपने स्तर से बिचौलियों की जांच कर रही है। नाबालिग के परिजनों ने लिखित में बालिका के बालिग होने पर विवाह कराने की सहमति जताई थी।