रुद्रपुर। पंतनगर के तराई बीज विकास निगम में कर्मचारियों ने अपनी ही लैब में गेहूं बीज की जांच कर बीज के नमूनों को फेल बताकर करोड़ों के खेल को अंजाम दिया था। बिहार भेजने से पहले बीज प्रमाणिक संस्था की जांच में बीज के नमूने सही पाए गए थे। बीज नमूने फेल होने की गलत पुष्टि करने के बाद कर्मचारियों ने वितरकों की मिली भगत से योजना निकालकर बीज को ठिकाने लगाया था।
गेहूं बीज बिक्री के नाम पर किए गए घोटाले को टीडीसी कर्मचारियों ने सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया था। वर्ष 2015-16 में किसानों की फसल के लिए तैयार किये गये गेहूं बीज को बिहार और यूपी के गोदामों में भेजने के लिए सबसे पहले बीज प्रमाणिक संस्था द्वारा जांचा गया। इसमें बीज पूरी तरह बुआई के लिए उपयोगी पाया गया। प्रमाणिक होने पर बीज गोदामों के लिए रवाना कर दिया गया।
कुछ समय बाद कर्मचारियों ने बिहार में बीज की उपज ना होने की बात कहकर बीज का नमूना लेकर टीडीसी की हल्दी लैब में जांच कराई और फेल बता दिया। बीज की मात्रा करीब करीब 85 हजार क्विंटल होने पर टीडीसी ने कर्मचारियों से इतने बड़े घाटे से उबरने के लिए सुझाव मांगे तो कर्मचारियों ने दो कट्टे के साथ एक कट्टा फ्री देने की योजना निकाली और बिहार में वितरकों की मदद से बीज को किसानों को देने की बजाय खपा दिया।
बीज ठिकाने लगाने के बाद जब बीज खरीदने वाले किसानों की सूची वितरकों से मांगी गई तो वितरक किसानों की सूची टीडीसी को उपलब्ध नहीं करा पाये और कर्मचारियों ने लैब में बीज नमूने फेल होने का स्पष्टीकरण दे दिया। इसके बाद घोटाले का खेल खुला था।
टीडीसी ने वितरकों से नहीं लिया ब्योरा
रुद्रपुर। बीज घोटाले में कर्मचारियों ने वितरकों के साथ मिलकर किसानों के नाम पर भेजे गये बीज को कहीं और खपा दिया। लेकिन टीडरीसी ने ना ही बिक्री का और ना ही लाभ उठाने वाले वितरकों से किसानों का ब्योरा लिया। यदि ब्योरा उस वक्त लिया जाता तो घपला पहले ही खुल सकता था।
खराब बीज पर दिया जाता है मनी बेक का लाभ
रुद्रपुर। टीडीसी की योजना के अनुसार अगर बीज से किसान की फसल तैयार नहीं होती है तो किसान को मनी बैक का लाभ दिया जाता है। इसके लिए टीडीसी के प्रोडक्शन निरीक्षक किसान के खेत की जांच कर रिपोर्ट तैयार करते हैं। अगर जांच में बीज गलत पाया जाता है तो किसान को उसका पैसा वापस दिया जाता है या नया बीज किसान ले सकता है। इसके लिए किसान को बीज का बैग और बीज प्रमाणिक संस्था का टैग टीडीसी को वापस करना पड़ता है लेकिन कर्मचारी इस योजना को अमल में नहीं लाए।
कई और लोग भी एसआईटी जांच के दायरे में
रुद्रपुर। टीडीसी बीज घोटाले में दस कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। लेकिन टीडीसी बिहार के कर्मचारी, हल्दी लैब कर्मचारी और बीज वितरकों को भी एसआईटी मामले में आरोपी बना सकती हैं।