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यूपी के लोगों के नाम कर दी 55.52 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री

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सितारगंज। डियोढार गांव की विवादित 55.52 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री यूपी के लोगों को कर दी गई। मामला तब सामने आया जब भूमि रजिस्ट्री के बाद दाखिल खारिज में भूमि विक्रेता और मौके पर काबिज लोगों ने तहसीलदार के समक्ष आपत्ति जताई। तहसीलदार जगमोहन त्रिपाठी ने आपत्ति पर सुनवाई करने के बाद पांचों दाखिल खारिज के वादों को निरस्त कर दिया। दाखिल खारिज कराने में राजस्वकर्मी भी संदेह के घेरे में है।
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तहसीलदार जगमोहन त्रिपाठी ने अपने निर्णय में बताया कि ग्राम डियोढार में 55.52 एकड़ जमीन को दानदाता के कब्जे में दर्शाकर रजिस्ट्री कर दी गई। क्रेताओं ने अपने रिश्तेदारों को राज्य में अचल संपत्ति होना दर्शाकर रजिस्ट्री कराई। यह भूमि विवादित बताते हुए श्याम लाल, स्वर्ण कौर, बूटा सिंह, बगीचा सिंह, गुरमेल सिंह, राजेंद्र सिंह, गुरमीत सिंह, रंजीत कौर, कश्मीर कौर आदि ने अलग-अलग वादों के माध्यम से तहसीलदार की कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई।
आपत्तिकर्ताओं के अनुसार वर्ष 1981 से वाद चल रहा है जबकि कब्जा 1967 से है और हाईकोर्ट में वाद चल रहा है। विक्रेताओं ने दानपत्र झूठ बोलकर कराने का आरोप लगाया। दाखिल खारिज के लिए तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में भूमि पर विक्रयकर्ता का कब्जा दर्शा दिया। बाद में पुन: जांच कराई तो खरीददार और विक्रेताओं का मौके पर कब्जा नहीं मिला।
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तहसीलदार के दाखिल खारिज वाद निरस्त करने से खलबली मची हुई है। एक स्टांप पेपर का प्रयोग दो जगहों पर किया गया है। जांच में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ और कूट रचना कर एक ई-स्टांप पेपर का प्रयोग आर्टिकल 33 गिफ्ट में किया गया तो इसी नंबर के स्टांप पेपर का प्रयोग एग्रीमेंट में भी दर्शाया गया है। बताया जा रहा है कि तहसीलदार ने जांच के दौरान दस्तावेजों में कमियां देखने के बाद राजस्व उपनिरीक्षक की संदेहास्पद रिपोर्ट को देख डीएम के आदेश पर पुन: दूसरे राजस्व उपनिरीक्षक से जांच रिपोर्ट मंगाई। मौके पर करीब 20 से अधिक परिवार काबिज हैं।
तहसीलदार ने कहा कि उन्होंने आदेश पारित किए हैं। निर्णय के खिलाफ अपील की जा सकती है। इस संबंध में सब रजिस्ट्रार औसाफ मलिक से बात की तो उन्होंने बताया कि वह अभी काम से मुख्यालय गए हुए हैं। पत्रावलियां देखने के बाद ही कुछ बताया जा सकेगा।
प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है। रजिस्ट्री का मामला रजिस्ट्रार कार्यालय से संबंधित है। पूरे प्रकरण को देखा जा रहा है। राजस्व विभाग के किसी कर्मचारी की मिलीभगत सामने आएगी तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। - तुषार सैनी, एसडीएम सितारगंज।
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