काशीपुर। डीएम ने यूपी ठेकेदारी उन्मूलन अधिनियम-1958 के तहत किच्छा के प्राग फार्म की 1972. 75 एकड़ भूमि राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने इस भूमि पर वर्षों से काबिज चले रहे आ रहे परिवारों के लिए 7.30 हेक्टेयर भूमि छोड़ी है।
वर्ष 1933 में किच्छा के प्रागफार्म में नारायण अग्रवाल को क्राउन एक्ट 1895 के तहत जनपद ऊधमसिंहनगर के ग्राम गडरिया बाग, पंडरी, नूरपुर, रजापुरा, पंतपुरा, गंगोली, लक्ष्मीपुर, कनमन, बेहराभोज, तुर्कागौरी, महाराजपुर और श्रीपुर हजारा में कुल 5193 एकड़ भूमि 99 सालों के लिए लीज पर दी गई थी। नारायण अग्रवाल की मृत्यु के बाद यह लीज आश्रित शिव नारायण और करमेंद्र नारायण के नाम स्थानांतरित गई।
भारत-पाक विभाजन के बाद ग्राम महाराजपुर की 615 एकड़ और श्रीपुर हजारा गांव की कुल 747 एकड़ अर्थात कुल 1362 एकड़ भूमि शरणार्थियों को आवंटित कर दी गई। बदले में आनंदपुर की 30.82 एकड़ और ग्राम बंडिया की 177.76 एकड़ भूमि लीज धारकों को दी गई। लीज की शर्तों का उल्लंघन करने पर प्रशासन ने वर्ष 2014 में यूपी ठेकेदारी एबोलेशन (गेटा) एक्ट के तहत जिला प्रशासन ने ही गांवों की 2018. 58 एकड़ भूमि राज्य सरकार में निहित कर दी लेकिन आबादी होने के कारण सिर्फ 1972.75 एकड़ भूमि पर ही कब्जा ले सका। इसकेेे खिलाफ लीज धारकों ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में याचिका प्रस्तुत की।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने जिला मजिस्ट्रेट को सुनवाई करने के निर्देश दिए। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में प्राग फार्म के 23 लीजधारकों को पक्षकार बनाया गया था। राज्य सरकार की ओर से मनोज तिवारी, अमरीश अग्रवाल एड. और वीरेंद्र कंडारी ने पैरवी की। तीन नवंबर को जिला मजिस्ट्रेट युगल किशोर पंत ने शेष बची 1900.13 एकड़ भूमि सरकार में निहित करने के आदेश पारित क दिए। अदालत ने लीजधारक करमेंद्र नारायण अग्रवाल की पत्नी शशि अग्रवाल और उनके पुत्र मनोज अग्रवाल समेत उनके विधिक हितसाधकों के लिए 7.30 हेक्टेयर भूमि छोड़ने की बात कही है। आदेश में कहा गया है कि एक्ट नोटिफिकेशन की तिथि 30 जून 1966 अर्थात 1374 वीं फसली तक करमेंद्र, शशि व मनोज के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं।