-विदेश में रहकर भी उपाध्याय नहीं भूले अपनी जड़ें
कुंदन शाह
काशीपुर। काशीपुर में कुमाऊंनी बैठकी होली गायकी की लंबी परंपरा रही है। यहां के कई लोग ऐसे भी हैं जो विदेश में उच्च पदों पर रहकर भी अपनी सांस्कृतिक परंपरा को नहीं भूले और वहां भी कुमाऊंनी होली की अलख जगाई है।
यहां कुमाऊंनी होली के शास्त्रीय होली गायकों में पुरानी पीढ़ी के स्व. संतशरण माथुर थे। उनके निधन के बाद भी नई पी़ढ़ी ने इस परंपरा को जारी रखा है। कुमाऊंनी होली के शास्त्रीय गायन प्रेमियों में रामनगर मार्ग स्थित बैंक कॉलोनी निवासी मोहित उपाध्याय भी हैं। उन्होंने खाड़ी देश कतर में केमिकल इंजीनियर के पद पर रहते हुए भी
कतर में कुमाऊंनी होली गायकी जारी रखी।
उन्होंने बताया भारत वापस आने के बाद प्रत्येक वर्ष अपने घर पर बैठकी होली का आयोजन करते हैं । जिस किसी के घर पर कुमाऊंनी होली पर बुलावा आता है, वह वहां पहुंच जाते हैं। मोहित उपाध्याय ने बताया उनको शास्त्रीय संगीत से लगाव है। उन्होंने प्रयाग संगीत समिति से शास्त्रीय गायन में स्नातक की डिग्री ली है। यही से उनका लगाव कुमाऊंनी बैठकी होली में गाए जाने वाले शास्त्रीय रागों से हुआ। काशीपुर में उन्होंने स्व. संतशरण माथुर, स्व. मदन मोहन पंत जैसे कुमाऊंनी होली के शास्त्रीय संगीत पर आधारित गायकों के सानिध्य में होली गायन सीखा। वह वर्ष 2008 में खाड़ी देश कतर गए। वहां उनका परिचय उत्तराखंड एसोसिएशन के नेता कमल कांत शर्मा, दीपक सकलानी, आरडी पंत से हुआ। उनके अनुरोध पर यह लोग हर साल कुमाऊंनी बैठकी होली का आयोजन करने लगे। इसमें सभी हिंदुस्तानी भाग लेते हैं। इसी बहाने विदेश में रहकर उत्तराखंड की अनमोल संस्कृति का प्रकाश फैलाने का अवसर मिला। यह अपनी माटी से जुड़ाव का माध्यम था। इसी बहाने आपस में दुख सुख बांटते हैं। अपने देश की याद ताजी करते थे।
उपाध्याय ने बताया कि वह वर्ष 2017 में भारत लौट आया और डेयरी खोलकर निजी व्यवसाय शुरू किया। यहां आकर फिर से कुमाऊंनी होली के गायक
योगेश जोशी, शरद पंत, शोभित गुड़िया के साथ बैठकी होली के कार्यक्रमों में भाग लेता हैं। उन्होंने बताया हर साल उनके घर पर बैठकी होली का आयोजन होता है। यह उत्तराखंड की महान सास्कृतिक परंपरा को जारी रखने और सामाजिक एकता के लिए आवश्यक है।